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सरकारी कॉलोनियों में प्यास का तांडव और अफसरों की रहस्यमयी चुप्पी

 


जबलपुर। शहर की विभिन्न शासकीय आवास कॉलोनियों में इन दिनों पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने इस समस्या पर गहरी चिंता जताते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों की कार्यप्रणाली की कड़ी निंदा की है। संघ के जिला अध्यक्ष अटल उपाध्याय ने बताया कि कर्मचारियों के वेतन से हर महीने आवास का किराया तो नियमित रूप से काट लिया जाता है, परंतु बुनियादी सुविधाओं के नाम पर उन्हें केवल आश्वासन मिल रहे हैं। गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले ही इन क्षेत्रों में पानी की किल्लत बढ़ गई है, जिसे दूर करने के प्रति जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं।

बुनियादी सुविधाओं के अभाव में रहने को मजबूर कर्मचारी

​वर्तमान में लोक निर्माण विभाग, शिक्षा, पुलिस, स्वास्थ्य, वन, राजस्व, पीएचई बरगी हिल्स और नगर निगम के शासकीय आवासों में ट्यूबवेल जवाब दे रहे हैं। मेडिकल के पीछे की कॉलोनी, केंट थाने के सामने और गढ़ा थाने के पास स्थित आवासों में रखी पानी की टंकियां अत्यंत जर्जर स्थिति में हैं। लंबे समय से सफाई न होने के कारण टंकियों के भीतर काई और गंदगी जमा हो गई है, जिससे दूषित जलापूर्ति का खतरा बढ़ गया है। बरगी हिल्स और ब्यौहार बाग के क्वार्टरों में रहने वाले कर्मचारी दूर-दराज से पानी लाने को विवश हैं।

गंदगी और तकनीकी खामियों से बाधित हुई जलापूर्ति

​वन विभाग के एसएफआरआई, आईटीआई, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के आवासों में बिछी पाइपलाइन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। विक्टोरिया कैंपस के सरकारी घरों में भी स्वच्छ पेयजल की भारी किल्लत बनी हुई है। इस ज्वलंत समस्या के निराकरण हेतु मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ की जबलपुर जिला शाखा के पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से आवाज उठाई है। मांग करने वालों में जिला अध्यक्ष अटल उपाध्याय, सचिव देवेंद्र पचौरी, कोषाध्यक्ष आलोक अग्निहोत्री, राहुल पांडेय, राजाराम डेहरिया, योगेंद्र मिश्रा, अजय दुबे, विनय नामदेव, सतीश उपाध्याय, राकेश उपाध्याय, अंशुल शाहू, सुशील गुप्ता, अर्जुन सोमवंशी, रवि बांगड़, राजू मस्के और जी पी द्विवेदी शामिल हैं। इन सभी ने प्रशासन से शीघ्र जलापूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है।

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