जबलपुर। कलेक्टर कार्यालय की पंजीयन शाखा ने जिले के नागरिकों के लिए संपत्ति पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मध्य प्रदेश शासन के निर्णय के बाद जिले में संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर के जरिए फेसलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को विधिवत रूप से लागू कर दिया गया है। इस नई तकनीक का प्राथमिक लक्ष्य दस्तावेजों के पंजीयन कार्य को पहले से कहीं अधिक सरल, जवाबदेह और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है। प्रशासन का मानना है कि इस बदलाव से रजिस्ट्री की पुरानी जटिलताओं का अंत होगा और आम जनता को सरकारी कार्यालयों की लंबी लाइनों और बार-बार के चक्करों से स्थाई निजात मिल सकेगी।
ऑनलाइन पंजीयन से समय की बचत और भीड़ से राहत
संपदा 2.0 व्यवस्था के सक्रिय होने से अब रजिस्ट्री कराने वाले पक्षकारों को व्यक्तिगत रूप से पंजीयन कार्यालय में उपस्थित होने की अनिवार्यता खत्म हो गई है। आधुनिक ई-पंजीयन सॉफ्टवेयर के माध्यम से अब नागरिक घर बैठे ही ऑनलाइन मोड में अपने दस्तावेजों का काम पूरा कर सकते हैं। इस सुविधा से न केवल लोगों के कीमती समय की बचत होगी, बल्कि कार्यालय परिसर में होने वाली अनावश्यक भीड़ में भी भारी कमी आएगी। प्रशासन ने इसे राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव करार दिया है, जिससे तकनीक के माध्यम से सीधा लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।
करप्शन और हेरफेर पर कसेगी लगाम
कलेक्ट्रेट द्वारा जारी ताजा निर्देशों के मुताबिक अब सेल डीड, लीज डीड और अन्य प्रमुख अनुबंधों का पंजीकरण अनिवार्य रूप से फेसलेस मोड में ही संपादित किया जाएगा। इसके लिए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे केवल इसी नई प्रणाली के तहत तैयार दस्तावेजों को स्वीकार करें। फेसलेस सॉफ्टवेयर के उपयोग से मानवीय हस्तक्षेप पूरी तरह समाप्त हो जाएगा, जिससे भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर अंकुश लगेगा और प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। सभी संबंधित अधिकारियों को इस महत्वाकांक्षी योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदारी सौंपी है ताकि प्रदेश में जबलपुर एक रोल मॉडल के रूप में उभर सके।
