जबलपुर। लोक निर्माण विभाग में नियमों को ताक पर रखकर टेंडर हथियाने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। सरकारी दस्तावेजों की स्कैन कॉपी का सहारा लेकर और अवास्तविक रूप से कम दरों पर ठेके लेने की शिकायतों के बाद विभाग ने कड़ा फैसला लिया है। जांच में प्रथम दृष्टया गड़बड़ी पाए जाने पर जबलपुर समेत प्रदेश के 16 जिलों में टेंडर प्रक्रियाओं को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया गया है। यह कार्रवाई उस समय की गई है जब यह पाया गया कि ठेकेदारों ने अफसरों के साथ सांठगांठ कर पूरी व्यवस्था को ही हाईजैक कर लिया था।
मूल शर्तों को गायब कर दिया
जांच के दौरान सबसे गंभीर अनियमितता जबलपुर संभाग में देखने को मिली है। यहाँ टेंडर की 'बिड डाटा शीट' यानी मुख्य फॉर्म के साथ छेड़छाड़ की गई। शासन के नियमानुसार, संशोधित निविदा शर्तों को मुख्य फॉर्म का हिस्सा होना अनिवार्य था, ताकि वे कानूनी रूप से बाध्यकारी रहें। लेकिन, जबलपुर के विभागीय अधिकारियों ने मिलीभगत करते हुए इन शर्तों को मुख्य दस्तावेज से हटा दिया। इसकी जगह शासन के आदेश की एक साधारण स्कैन कॉपी को फाइल के अंत में नत्थी कर दिया गया। इस तकनीकी लूपहोल का लाभ उठाकर ठेकेदारों ने कम रेट्स पर काम हासिल कर लिया, क्योंकि उन्हें पता था कि मुख्य फॉर्म में शर्त न होने के कारण वे भविष्य में किसी भी कानूनी जवाबदेही से बच सकते हैं।
मशीनों की हकीकत खंगालेगी टीम
कागजी खानापूर्ति के दौर को समाप्त करते हुए विभाग ने अब 'फिजिकल वेरिफिकेशन' का रास्ता चुना है। सितंबर और अक्टूबर 2025 के बीच जितने भी विवादित टेंडर जारी हुए हैं, उनकी अब निर्माण स्थल पर जाकर जांच की जाएगी। विशेष जांच टीमें यह देखेंगी कि ठेकेदारों ने फॉर्म में जिन भारी मशीनों और अत्याधुनिक संयंत्रों के स्वामित्व का दावा किया था, वे वास्तव में मौके पर उपलब्ध हैं या नहीं। अक्सर देखा गया है कि ठेकेदार केवल कागजों पर मशीनरी दिखाते हैं और असल में पुरानी या किराए की मशीनों से काम निपटा देते हैं। विभाग ने आदेश दिया है कि जब तक भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट 'ओके' नहीं होती, तब तक न तो नए कार्यादेश जारी होंगे और न ही ठेकेदारों का भुगतान किया जाएगा।
-डामर और तकनीकी स्टाफ: गुणवत्ता के नए कड़े मापदंड
भ्रष्टाचार की जड़ों पर प्रहार करने के लिए विभाग ने डामर (बिटुमिन) की खरीद और तकनीकी स्टाफ की मौजूदगी को अनिवार्य कर दिया है। अब ठेकेदारों को हर बिल के साथ यह प्रमाणित करना होगा कि उपयोग किया गया डामर केवल सरकारी रिफाइनरी से ही खरीदा गया है। इसके लिए रिफाइनरी के बिलों का विभाग द्वारा सीधे क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाएगा। इसके अलावा, निर्माण स्थल पर एक सक्रिय लैब और योग्य इंजीनियरिंग स्टाफ की उपस्थिति भी अनिवार्य कर दी गई है। यदि स्थल पर लैब नहीं मिली या तकनीकी स्टाफ गायब पाया गया, तो ठेकेदार के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
-ब्लैकलिस्टिंग की तलवार:लापरवाह ठेकेदारों में हड़कंप
सरकार की इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' ने उन ठेकेदारों के बीच खलबली मचा दी है जो अत्यधिक कम दरें डालकर प्रतिस्पर्धा को खत्म कर देते थे और बाद में गुणवत्ता से समझौता कर अपना मुनाफा वसूलते थे। जबलपुर के साथ-साथ सागर, रायसेन, सतना, खरगोन और छिंदवाड़ा जैसे जिलों में भी निविदाओं की सूक्ष्म जांच शुरू हो गई है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जिन ठेकेदारों के दस्तावेज फर्जी पाए जाएंगे या जिनके काम की गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं होगी, उन्हें न केवल काम से हाथ धोना पड़ेगा, बल्कि उन्हें हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट में डाल दिया जाएगा।
