नर्मदा से निकली रेत की नदी के हवाले


रेत चोरी पर अमले की कार्रवाई, वाहन किये जब्त,मुरुम-बोल्डर के अवैध खनन पर उठे सवाल

जबलपुर। जिले में रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन की लगातार मिल रही शिकायतों को कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने गंभीरता से लिया है। शनिवार को अवकाश के बावजूद, कलेक्टर के सख्त निर्देशों पर माइनिंग टीम ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ दबिश दी। जिला माइनिंग अधिकारी एके राय ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य माफियाओं के नेटवर्क को तोड़ना और अवैध रूप से निकाले गए खनिज को उनके कब्जे से मुक्त कराना था। कार्रवाई के दौरान सिहोरा में रेत का अवैध परिवहन कर रहे तीन ट्रैक्टरों को जब्त किया गया, वहीं देवरी, खिरहनी और घोराकोनी के घाटों पर सघन जांच की गई।

शहपुरा और कुंडम में नष्ट किया गया रेत का स्टॉक

​कार्रवाई के दौरान टीम ने एक अनूठी रणनीति अपनाई; माफियाओं द्वारा बेचे जाने के लिए इकट्ठा की गई रेत को वापस नदी में ही मिला दिया गया। शहपुरा क्षेत्र के ग्राम भड़पुरा, इशितपुर और मालकछार में कार्रवाई करते हुए करीब 100 हाइवा रेत को नदी में बहा दिया गया। इसी तरह कुंडम के रानीपुर और कल्याणपुर घाटों पर दबिश देकर 50 हाइवा रेत का स्टॉक नष्ट किया गया। प्रशासन ने न केवल रेत को नदी में वापस मिलाया, बल्कि उन अवैध रास्तों और रैंपों को भी जेसीबी से खोदकर नष्ट कर दिया, जिनका उपयोग रेत ढोने के लिए किया जा रहा था। इस कार्रवाई से माफियाओं को लाखों रुपये की आर्थिक चोट पहुँची है।

बोल्डर और मुरुम के अवैध खनन पर उठे सवाल

​एक तरफ जहाँ प्रशासन ने रेत चोरी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, वहीं कुंडम के लौहकरी क्षेत्र में हो रहे बोल्डर और मुरुम के अवैध उत्खनन ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहाँ जेसीबी मशीनों से पहाड़ियों को छलनी कर बड़े पैमाने पर मुरुम निकाली जा रही है और क्रेशरों में बोल्डर की सप्लाई हो रही है, लेकिन इस पर रोक लगाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे। माइनिंग अधिकारी श्री राय का कहना है कि रेत के खिलाफ यह अभियान सतत जारी रहेगा और अन्य खनिजों के अवैध उत्खनन पर भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।

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