khabar abhi tak

एडमिशन लाओ वरना घर जाओ,प्रबंधन के फरमान से सकते में गुरुजी


जबलपुर
। शिक्षा के क्षेत्र में व्यवसायीकरण इस कदर बढ़ गया है कि अब छात्रों की क्लास लेने वाले शिक्षक सड़कों पर कॉलेज के पंपलेट बांटते नजर आएंगे। जबलपुर सहित प्रदेश के कई निजी कॉलेज संचालकों ने अपनी कॉलेज की मार्केटिंग को लेकर एक नया मौखिक फरमान जारी किया है। इसके अनुसार अब कॉलेज की फैकल्टी और प्रोफेसरों को 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के केंद्रों पर जाना होगा और वहां कॉलेज की खूबियां बताकर अपनी संस्था का ब्रोशर और पंपलेट बांटने होंगे। सूत्रों के अनुसार, कॉलेज प्रबंधन ने शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उनके प्रदर्शन और प्रमोशन को अब इस 'फील्ड वर्क' से जोड़ा जाएगा। पहले यह काम मार्केटिंग टीम या कॉलेज के छोटे कर्मचारी किया करते थे, लेकिन इस सत्र में फैकल्टी को ही मैदान में उतार दिया गया है। तर्क यह दिया जा रहा है कि जब शिक्षक खुद छात्रों से बात करेंगे, तो एडमिशन की संभावना बढ़ जाएगी।

​-क्या इस दिन के लिए की थी पीएचडी

​निजी कॉलेज के एक प्रोफेसर ने नाम न छापने की शर्त पर अपनी व्यथा बताई। उन्होंने कहा, "हमने पीएचडी और नेट की पढ़ाई इसलिए नहीं की थी कि हमें धूप में खड़े होकर कागज बांटने पड़ें। यह न केवल हमारे पद की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि मानसिक प्रताड़ना भी है। लेकिन नौकरी बचाने के डर से हमें यह काम मजबूरी में करना पड़ रहा है।

​ -शैक्षणिक स्तर बेहद बुरा असर

​विशेषज्ञों का मानना है कि जब एक शिक्षक का मुख्य काम छात्रों को पढ़ाने और शोध करने के बजाय मार्केटिंग करना बन जाएगा, तो शिक्षा के स्तर का गिरना तय है। परीक्षा केंद्रों के बाहर शिक्षकों की यह 'ड्यूटी' छात्रों और अभिभावकों के बीच भी गलत संदेश दे रही है। शिक्षकों को इस तरह के कार्यों में झोंकना शिक्षा की मूल भावना के विपरीत है।

​- नियमों के विरुद्ध है यह 'पंपलेट अभियान'

​इस संबंध में जब लीड कॉलेज प्रोफेसर अलकेश चतुर्वेदी से बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि 'कॉलेज चलो अभियान' के अंतर्गत शिक्षण सत्र में कॉलेज कैंपस का भ्रमण कराने के निर्देश हैं। परीक्षा के दौरान केंद्रों के बाहर शिक्षकों से पंपलेट या ब्रोशर बंटवाना इस अभियान का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में शिकायत मिलने पर नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak