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कैबिनेट का फैसला: पेंशन नियमों में ऐतिहासिक संशोधन: मानसिक दिव्यांग संतान भी होगी फैमिली पेंशन की पात्र

प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह 

जबलपुर। 
 मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के हित में पेंशन व्यवस्था को लेकर एक क्रांतिकारी निर्णय लिया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में नेशनल पेंशन स्कीम और ओल्ड पेंशन स्कीम के नियमों में बड़े संशोधन किए गए हैं। नए प्रावधानों के अनुसार, अब एनपीएस के तहत आने वाले कर्मचारियों की असामयिक मृत्यु पर उनके परिजनों को फैमिली पेंशन का लाभ मिलेगा, जो अब तक उपलब्ध नहीं था। यदि 1 जनवरी 2005 के बाद भर्ती किसी कर्मचारी की मृत्यु 10 वर्ष की सेवा से पहले हो जाती है, तो सरकार अपने वित्तीय संसाधनों से अंतिम वेतन का एक-तिहाई हिस्सा फैमिली पेंशन के रूप में देगी। इसके साथ ही सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए अब मानसिक रूप से दिव्यांग संतान को भी फैमिली पेंशन के दायरे में शामिल कर लिया है। पहले यह सुविधा केवल शारीरिक विकलांगता तक सीमित थी। अब 40% से अधिक दिव्यांगता का प्रमाणपत्र होने पर ऐसी संतानें पेंशन की पात्र होंगी। साथ ही, तलाकशुदा बेटियों के लिए उम्र की सीमा हटा दी गई है; वे अब पुनर्विवाह होने तक पेंशन की हकदार होंगी। ये सभी नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे, जिससे लगभग 8 लाख एनपीएस कर्मचारी और 6 लाख ओपीएस कर्मचारी लाभान्वित होंगे।

​मप्र राज्य कर्मचारी संघ ने फैसले का किया स्वागत

​मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव, प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह और प्रदेश प्रवक्ता अनिल भार्गव 'वायु' ने इस पहल की सराहना की है। संघ के नेताओं का कहना है कि सरकार ने एनपीएस की सबसे बड़ी कमी को दूर कर कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित किया है। संघ के प्रमुख सदस्यों जिनमें अटल उपाध्याय, देवेंद्र पचौरी, आलोक अग्निहोत्री, योगेन्द्र मिश्रा, अर्जुन सोमवंशी, रजनीश पांडेय, विनय नामदेव, सतीश उपाध्याय, सुशील गुप्ता, राजा राम डहरिया, परशुराम तिवारी, अजय दुबे, राहुल पांडेय और अरुण पटेल शामिल हैं, ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि इस आदेश से प्रदेश के लाखों परिवारों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्राप्त होगी।

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