प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट में जबलपुर का नर्मदा जल 'ए' श्रेणी में


जबलपुर नगर निगम का दावा: माँ नर्मदा में अब नहीं गिरेगा नालों का गंदा पानी, एनजीटी ने जताई संतुष्टि

जबलपुर। नगर निगम ने शहर के बढ़ते शहरीकरण और सीवेज की समस्या का समाधान करने के लिए व्यापक कार्य योजना तैयार की है। वर्तमान में नगर निगम की सीमा के भीतर नर्मदा नदी में अनुपचारित पानी का मिलना पूरी तरह बंद कर दिया गया है। 12 एसटीपी प्लांटों के माध्यम से पानी को उपचारित करने के बाद ही प्रवाहित किया जा रहा है। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में नर्मदा जल को 'ए' श्रेणी का बताया गया है, जो इसकी शुद्धता का प्रमाण है। शहर में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले 174 एमएलडी सीवेज को प्रबंधित करने के लिए गौर ब्रिज, सिद्धघाट और उमाघाट जैसे तटों पर विशेष फिल्टरेशन इकाइयां सक्रिय हैं। इसके अलावा रानीताल और गुलौआ तालाब के संरक्षण के लिए भी पृथक एसटीपी कार्य कर रहे हैं।

अमृत 2.0 योजना से मजबूत होगा 100 प्रतिशत सीवेज सिस्टम


शहर का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा वर्तमान में सीवर नेटवर्क से बाहर है, जिसे कवर करने के लिए शासन ने अमृत 2.0 योजना के तहत 755.55 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इस योजना के अंतर्गत शहर में 682 किलोमीटर लंबी नई सीवर लाइन बिछाई जाएगी और लगभग 1.70 लाख घरों को सीधे सीवर कनेक्शन से जोड़ा जाएगा। इसका मुख्य लक्ष्य ओमती, मोती और करोंदा जैसे बड़े नालों के पानी को उपचारित करना है, जो वर्तमान में परियत नदी में मिलते हैं। नगर निगम ने शेष 10 प्रतिशत क्षेत्र के लिए भी 397 करोड़ का प्रस्ताव भेजा है, जिससे अगले 3 से 5 वर्षों में शहर का शत-प्रतिशत क्षेत्र सीवर नेटवर्क के दायरे में आ जाएगा।

12 नए प्लांटों के साथ बढ़ेगी उपचार की क्षमता

​वर्तमान में संचालित 12 एसटीपी की कुल क्षमता 104.38 एमएलडी है, जिसके माध्यम से औसतन 76 एम.एल.डी. सीवेज का शोधन किया जा रहा है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए 11 विभिन्न स्थानों पर 124 एम.एल.डी. क्षमता के नए प्लांट बनाए जा रहे हैं। इन प्रयासों का परिणाम है कि जून 2025 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भी नर्मदा की जल गुणवत्ता पर संतोष व्यक्त किया है। जल परीक्षण में पीएच लेवल और अन्य पैरामीटर निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए हैं।

धार्मिक और ऐतिहासिक तटों पर विशेष फोकस

​जबलपुर की लगभग 14.50 लाख की जनसंख्या से निकलने वाले कचरे को रोकने के लिए गौर ब्रिज, बबहा नाला, सिद्धघाट, उमाघाट और जैन गौशाला के समीप गिरने वाले नालों को पूरी तरह डाइवर्ट कर दिया गया है। इन नालों का गंदा पानी अब सीधे नर्मदा में न मिलकर ट्रीटमेंट प्लांटों में जाता है। साथ ही शहर के जल निकायों जैसे रानीताल और गुलौआ तालाब में भी केवल उपचारित जल ही छोड़ा जा रहा है, ताकि शहर के ऐतिहासिक जल स्रोतों की स्वच्छता बनी रहे।

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