अखबार के सम्पादक खबर के दस्तावेज पेश करें और डीजीपी दें हलफनामा


सागर पुलिस के दागी थाना प्रभारियों पर हाईकोर्ट की बड़ी कार्रवाई, गृह विभाग और डीजीपी से मांगा जवाब

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सागर जिले के चार पुलिस थाना प्रभारियों पर लगे भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों के गंभीर आरोपों को बेहद सख्ती से लिया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की खंडपीठ ने एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस द्वारा दायर जनहित याचिका (WP/47116/2025) पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को कड़े निर्देश जारी किए हैं।

थाने से ड्रग्स और अवैध शराब बेचने के गंभीर आरोप

​याचिका का मुख्य आधार 30 नवंबर 2025 को प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट है, जिसमें खुलासा किया गया था कि सागर के चार थानों में पुलिस के संरक्षण में अवैध शराब बेची जा रही है। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि मोतीनगर थाने के भीतर से एक नाबालिग ने ड्रग्स की 15 पुड़िया लाकर दीं। इसके अलावा, नगर निगम के पास स्थित स्पा सेंटरों में पुलिस की मिलीभगत से देह व्यापार संचालित होने के साक्ष्य भी स्टिंग ऑपरेशन के ऑडियो-वीडियो के माध्यम से न्यायालय में पेश किए गए हैं।

 गृह सचिव और डीजीपी को शपथ पत्र पेश करने का आदेश

​माननीय हाईकोर्ट ने पुलिस जैसी कानून रक्षक एजेंसी द्वारा कानून की धज्जियां उड़ाने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। न्यायालय ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी को आदेश दिया है कि वे 20 फरवरी 2026 तक व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल करें। उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि इस खबर के प्रकाशित होने के बाद दोषी पुलिस अधिकारियों पर अब तक क्या प्रशासनिक और दंडात्मक कार्यवाही की गई है।

3. संपादक को रिकॉर्ड पेश करने और अगली सुनवाई के निर्देश

​न्यायालय ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित समाचार पत्र के चीफ एडिटर को भी निर्देश दिए हैं कि वे खबर से जुड़े तमाम मूल दस्तावेज और रिकॉर्ड कोर्ट में जमा करें। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर समेत अन्य वकीलों ने पक्ष रखा। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी, जिसमें सरकार के जवाब के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।

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