जबलपुर में हिस्ट्रीशीटर अब्दुल रज्जाक की याचिका पर सुनवाई,सरकारी अधिवक्ता बोले, हिरासत आधार स्पष्ट नहीं, नई याचिका सुनने योग्य नहीं

जबलपुर। एमपी के जबलपुर में रहने वाले कुख्यात हिस्ट्रीशीटर  अब्दुल रज्जाक की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। राज्य सरकार ने याचिका पर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि जब हिरासत का आधार ही स्पष्ट नहीं है, तो इसे कैसे चुनौती दी जा सकती है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस राजेंद्र कुमार वानी ने सुनवाई करते हुए अगली तारीख 16 मार्च तय की है।

                                    सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और शासकीय अधिवक्ता मानस मणि वर्मा ने कोर्ट को बताया कि रज्जाक की पत्नी सबीना बेगम ने पहले हिरासत के खिलाफ याचिका दायर की थी। जिसे 8 जुलाई 2025 को वापस ले लिया गया था। अब नई याचिका में हिरासत का ठोस आधार नहीं बताया गया है, इसलिए यह सुनने योग्य नहीं है। सरकार ने यह भी कहा कि राहत के लिए आरोपी को नियमित जमानत आवेदन देना चाहिए न कि इस तरह की याचिका। याचिका में आरोप लगाया गया है कि व्यवसायिक प्रतिद्वंद्विता के चलते रज्जाक पर एनएसए के तहत कार्रवाई की गई और यह कार्रवाई पूर्व मंत्री व विधायक संजय पाठक के इशारे पर हुई। हाईकोर्ट के निर्देश पर 31 अक्टूबर को विधायक का नाम सार्वजनिक होने के बाद उन्हें नोटिस जारी किया गया था। हालांकि संजय पाठक ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि उनका इस कार्रवाई से कोई संबंध नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट मोहम्मद अली और अधिवक्ता शारिक अकील फारूकी ने सरकार की आपत्तियों पर जवाब देने के लिए समय मांगा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को तय करते हुए कार्यवाही स्थगित कर दी।

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