स्कूल पैरेंट्स को पीडीएफ भेजकर प्रिंट निकालने मजबूर न करें:कलेक्टर


कलेक्टर की अध्यक्षता में स्कूलों की महत्वपूर्ण बैठक: यातायात नियमों और पुस्तक मेले पर कड़े निर्देश

जबलपुर। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई, जिसमें जिले के सभी प्रमुख बोर्डों से संबद्ध विद्यालयों के प्राचार्य और संचालकों ने भाग लिया। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु आगामी सत्र के लिए यातायात प्रबंधन और मार्च माह में आयोजित होने वाले पुस्तक एवं गणवेश मेले की तैयारियों को लेकर था। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और अभिभावकों की सुविधा के मामले में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

परिवहन नियमों में सख्ती: 15 वर्ष पुराने वाहन होंगे प्रतिबंधित


यातायात प्रबंधन पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि आगामी शैक्षणिक सत्र से स्कूलों में 15 वर्ष से अधिक पुराने और एलपीजी गैस से चलने वाले वाहनों का संचालन पूरी तरह से बंद रहेगा। सभी स्कूली बसों में 'स्पीड गवर्नर' लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बसों के पीछे स्कूल का नाम और संपर्क नंबर स्पष्ट रूप से अंकित करना होगा, ताकि तेज रफ्तार की शिकायत की जा सके। इसके अतिरिक्त, स्कूल परिसरों में सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे, स्टॉपर और प्रशिक्षित वालंटियर तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मुख्य द्वारों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति निर्मित न हो। अब बिना हेलमेट के किसी भी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

पुस्तक मेला और सामाजिक जागरूकता पर जोर

​मार्च माह में प्रस्तावित पुस्तक एवं गणवेश मेले के संबंध में कलेक्टर ने निर्देशित किया कि सभी स्कूल अपनी निर्धारित पुस्तकों और यूनिफॉर्म की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करें। उन्होंने विशेष रूप से चेतावनी दी कि अभिभावकों को अनावश्यक पीडीएफ भेजकर प्रिंट निकलवाने के लिए बाध्य न किया जाए। शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक सुधार की दिशा में भी स्कूलों को सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया है, जिसमें नियमित नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम, यातायात नियमों का पाठ और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए निरंतर काउंसलिंग की व्यवस्था शामिल है। बैठक में जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गेहलोत, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) श्रीमती अंजना तिवारी और आरटीओ संतोष पॉल सहित शिक्षा विभाग के आला अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने बेहतर क्रियान्वयन के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।

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