पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गांव की पहाड़ी पर स्थित इस देव स्थल का स्थानीय ग्रामीणों ने जन सहयोग से जीर्णोद्धार कर मंदिर का निर्माण किया था। अब यहां दुर्गा प्रतिमा की स्थापना को लेकर दोनों पक्षों में टकराव हो गया। आदिवासी समाज का दावा है कि वे पीढिय़ों से इस स्थल पर खेरमाई (खेरोदाई) माता की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। उनके अनुसार यह उनका पारंपरिक पेन ठाना है। जहां वे प्रकृति और अपने पुरखों की शक्तियों की पूजा करते हैं। वहीं दूसरे पक्ष के स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर का निर्माण गांव के लोगों के चंदे और आपसी सहमति से किया गया है। उनका आरोप है कि कुछ बाहरी लोगों के उकसाने के कारण यह विवाद पैदा हुआ है। मौके पर पहुंचे जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि पुराने मंदिर का सभी गांव वालों के सहयोग से जीर्णोद्धार कर नया मंदिर बनाया गया है। पहले यह तय हुआ था कि दोनों पक्षों की आपसी रजामंदी के बाद ही मूर्ति स्थापना की जाएगी। इस बीचमूर्ति स्थापित कर दी गई। गांव में तनाव के माहौल को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। मंदिर को अपने कब्जे में लेकर सील कर दिया है।