सुप्रीम कोर्ट से जीते, पर सिस्टम से हारे? एमआईएल के आदेश पर आयुध कर्मियों का हल्लाबोल


जबलपुर।
लंबी कानूनी लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आयुध निर्माणी कर्मचारियों को उम्मीद थी कि उनके ओवर टाइम (ओटी) एरियर का भुगतान अब निर्बाध रूप से हो जाएगा। लेकिन म्युनिशंस इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) पुणे के सीएमडी द्वारा जारी एक नए आदेश ने कर्मचारियों की खुशी को आक्रोश में बदल दिया है। बुधवार को आयुध निर्माणी खमरिया (ओएफके) में संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्य महाप्रबंधक के माध्यम से सीएमडी को ज्ञापन सौंपकर एकमुश्त भुगतान की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप

​संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय ने 20 जनवरी को ओटी एरियर विवाद पर अंतिम फैसला सुना दिया है। इसके बाद यह अपेक्षित था कि प्रबंधन 1 जनवरी 2006 से लंबित सभी एरियर का भुगतान तुरंत करेगा। हालांकि, एमआईएल द्वारा 6 फरवरी 2026 को जारी पत्र में केवल मार्च 2026 से आंशिक भुगतान की बात कही गई है। विशेष रूप से 30 सितंबर 2021 (निगमीकरण से पूर्व) के बकाये को फंड की उपलब्धता और एनडीसीडी की स्वीकृति के नाम पर टालना कर्मचारियों को नागवार गुजर रहा है।

अन्य रक्षा उपक्रमों की तुलना में भेदभाव का मुद्दा

​यूनियन पदाधिकारियों ने तर्क दिया कि अन्य रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों ने समान न्यायिक आदेशों का पालन करते हुए अपने कर्मचारियों को पूर्ण एरियर का भुगतान कर दिया है। ऐसी स्थिति में केवल एमआईएल द्वारा भुगतान को चरणबद्ध या श्रेणियों में बांटना कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार है। निगमीकरण के समय सरकार ने आश्वासन दिया था कि कर्मचारियों के वेतन और सेवा लाभ पूरी तरह संरक्षित रहेंगे, लेकिन वर्तमान आदेश इस भरोसे के विपरीत है।

औद्योगिक शांति भंग होने की चेतावनी

​समिति ने स्पष्ट किया है कि प्रबंधन का यह निर्णय औद्योगिक सौहार्द पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। ज्ञापन सौंपने के दौरान राजेंद्र चराडिया, अर्नबदास गुप्ता, रूपेश पाठक, अजय यादव सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने प्रबंधन से अपील की है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का निष्पक्ष अनुपालन करते हुए 1 जनवरी 2006 से अब तक के पूरे एरियर का एकमुश्त भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

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