पूर्व उपायुक्त जगदीश सरवटे की 11.81 करोड़ की संपत्तियां ईडी ने की अटैच


जबलपुर।
प्रवर्तन निदेशालय  के भोपाल जोनल ऑफिस ने जबलपुर स्थित आदिम जाति कल्याण विभाग के पूर्व उप निदेशक जगदीश प्रसाद सरवटे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट  के तहत उनकी 11.81 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है।यह कार्रवाई आर्थिक अपराध शाखा जबलपुर द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के मामले के आधार पर की गई है। जांच में सामने आया कि सरवटे ने अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध धन अर्जित किया और उसे मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से अचल संपत्तियों में निवेश किया।

रिसॉर्ट, रेस्टोरेंट और बाघ की खाल का खुलासा

​ईओडब्ल्यू की शुरुआती छापेमारी में पता चला था कि सरवटे ने करोड़ों की काली कमाई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में खपाई थी। इसमें कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित मराठा रिसॉर्ट और मंडला रोड पर जायका रेस्टोरेंट शामिल हैं। इसके अलावा, जबलपुर के अधारताल स्थित उनके पैतृक आवास से बाघ की खाल और भारी मात्रा में महंगी शराब भी बरामद हुई थी, जिसके बाद उनकी मां सावित्री सरवटे पर वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी।

इन जिलों में फैली है काली कमाई की संपत्ति

​ईडी की जांच के अनुसार, आरोपी ने मध्य प्रदेश के भोपाल, मंडला, उमरिया और सिवनी जिलों में संपत्तियां बना रखी थीं। इन संपत्तियों में आवासीय मकान, कृषि भूमि, व्यावसायिक भूखंड और रेस्टोरेंट शामिल हैं। जांच में यह भी पाया गया कि कई संपत्तियां नकद भुगतान के माध्यम से खरीदी गईं, जबकि कुछ के लिए लिए गए ऋणों को अज्ञात नकद जमा राशि से चुकाया गया था।

 पद का दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग का खेल

​आरोपी जगदीश प्रसाद सरवटे ने आदिम जाति कल्याण विभाग में सेवा के दौरान भ्रष्टाचार के जरिए आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की। ईडी ने पाया कि सरवटे ने अपराध की इस आय को प्लेसमेंट, लेयरिंग और इंटीग्रेशन के जरिए अचल संपत्तियों में बदला, ताकि दागी धन को बेदाग संपत्ति के रूप में प्रदर्शित किया जा सके। फिलहाल,ईडी इन संपत्तियों के हस्तांतरण को रोकने के लिए जब्ती की कार्रवाई कर चुकी है।

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