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संस्कारधानी की सड़कों पर गूंजा लोकतंत्र का शंखनाद,भाजपा की पदयात्रा में दिखा उत्साह




जबलपुर। संस्कारधानी के गोल बाजार शहीद स्मारक से लोकतंत्र बचाओ और अराजकता हटाओ संकल्प को लेकर 2.5 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकाली गई, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल और केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल शामिल हुए। 1 लाख से अधिक जनसमूह की मौजूदगी वाले इस आयोजन में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मंत्री राकेश सिंह, प्रहलाद पटेल, संपतिया उइके, सांसद आशीष दुबे, सुमित्रा वाल्मीकि, फग्गन सिंह कुलस्ते, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू सहित 55 स्वागत मंचों के प्रतिनिधि जुटे। सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का विरोध करने वाले और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने वाले दल जनाधार खो चुके हैं। देश की जनता लोकतांत्रिक मर्यादाओं, निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया तथा पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।

​इतिहास गवाह है जनता ने अराजकता नकारी

​मुख्यमंत्री ने कहा कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ अन्याय करने वाली पार्टी किसी की हितैषी नहीं हो सकती। आपातकाल थोपकर संवैधानिक मर्यादाओं का हनन करने वालों को नैतिक उपदेश देने का अधिकार नहीं है। देश के 80 प्रतिशत भूभाग से बाहर हो चुकी पार्टी वर्ष 2029 तक शेष 20 प्रतिशत हिस्से से भी साफ हो जाएगी। पराजय के बाद कभी मतदान मशीन तो कभी चुनाव आयोग पर दोष मढ़ना पुरानी आदत बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सामान्य पृष्ठभूमि के व्यक्तियों के लिए सर्वोच्च पदों के द्वार खोलकर परिवारवाद की संकीर्ण परिपाटी तोड़ी है।

​संस्थाओं पर सवाल उठाने वाले बेनकाब होंगे

​भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची शुद्धिकरण प्रक्रिया पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में भी अनेक बार संपन्न हुई। वर्तमान व्यवस्था में केवल दो बार यह अभियान चला है। विदेशी धन के सहारे आंतरिक शांति बाधित करने वाली ताकतों को पहचानना जरूरी है। फर्जी प्रविष्टियों और अपात्र नामों को हटाने का विरोध करके केवल चुनावी विफलता को ढंकने का प्रयास किया जा रहा है। निष्पक्ष मतदान व्यवस्था के संरक्षण के लिए समाज के प्रत्येक घटक को आगे आना होगा।

​अदालत और आयोग को धमकाना अस्वीकार्य है

​केंद्रीय मंत्री ने 6 अक्टूबर को निर्वाचन आयोग कार्यालय के बाहर हुए घटनाक्रम तथा 10 विपक्षी सांसदों द्वारा राष्ट्रपति के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत न कर पाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 11 और 12 अक्टूबर 2026 को देश के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि सर्वोच्च न्यायालय को किसी भी दबाव में नहीं लिया जा सकता। विधिक प्रक्रियाओं के स्थान पर सड़कों पर दबाव की राजनीति करने वाले तत्वों को जनता का समर्थन कभी नहीं मिलेगा।

​संस्कारधानी के 55 मंचों से हुआ स्वागत

​गोल बाजार से प्रारंभ होकर श्याम टॉकीज, सुपर मार्केट, लार्डगंज, बड़ा फुहारा, अंधेरदेव, मालवीय चौक होते हुए यात्रा संपन्न हुई। मार्ग में महाकौशल चैंबर, बार एसोसिएशन, मेडिकल एसोसिएशन, रोटरी क्लब, सिंधी, जैन, सिख, महाकोशल चौरसिया, यादव, कुर्मी क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ, विश्वकर्मा समाज सहित 55 मंचों से पुष्पवर्षा हुई। रथ पर सवार महामंडलेश्वर अखिलेश्वरानंद, राघवदेवाचार्य, बालगोविंदाचार्य, अशोका नंद, ज्ञानेश्वरी दीदी सहित अनेक संतों की उपस्थिति रही। विधायक अजय विश्नोई, अशोक रोहाणी, सुशील तिवारी इंदु, अभिलाष पांडे, नीरज सिंह, संतोष बरकड़े, प्रणय पाण्डे, पूर्व मंत्री शरद जैन, आलोक संजर, अश्विनी परांजपे, विनोद गोटिया, संदीप जैन, रविकरण साहू, रत्नेश सोनकर, राजकुमार पटेल, आशा गोटिया, पंकज दुबे, रंजीत पटेल, सोनू बचवानी ने सहभागिता निभाई।

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