khabar abhi tak

बिजली कंपनी का चक्रव्यूह: तारों के नीचे अवैध निर्माणों को मिले ताबड़तोड़ नोटिस




जबलपुर। मध्य प्रदेश में हाई वोल्टेज तारों के नीचे खतरे की जद में खड़े भवनों को हटाने की जमीन तैयार हो चुकी है। जबलपुर में प्रतिबंधित गलियारे में हुए निर्माणों को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने ऊर्जा एवं नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिवों सहित 10 वरिष्ठ अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। इसी न्यायिक आदेश के पालन में मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने राज्य भर में 3610 निर्माणकर्ताओं को सीधे चेतावनी पत्र थमा दिए हैं। राज्य की राजधानी भी इससे अछूती नहीं है, जहाँ 3 मुख्य 132 केवी तारों के रास्ते पर बने 853 अवैध ढांचों को चिन्हित कर नोटिस जारी किए गए हैं।

​राजधानी के घने रिहायशी इलाकों में गहराया संकट

​शहरी फैलाव के चलते तारों के करीब बस्तियाँ बसती चली गईं। कंपनी के अधीक्षण अभियंता सुधीर नेमा के अनुसार शहर में भोपाल-गोविंदपुरा से बैरागढ़ टैप-लालघाटी, भोपाल-आईटी पार्क तथा भोपाल-अमरावती खुर्द मार्गों पर सबसे अधिक मनमानी देखी गई है। गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र, करोंद, नारियलखेड़ा, देवकीनंदन नगर, बैरागढ़, आनंद नगर, जैन कॉलोनी, कलियासोत और रतनपुर जैसे इलाकों में इमारतों की छतें लगभग तारों से सट चुकी हैं। नगर निगम और जिला प्रशासन के अमले को साथ लेकर कंपनी अब मैदानी स्तर पर जागरूकता फैलाने के साथ-साथ इन ढांचों पर कानूनी डंडा चलाने का खाका खींच चुकी है। स्थानीय स्तर पर मुनादी कराकर लोगों को यह समझाने का प्रयास भी जारी है कि नियमों की अनदेखी किस कदर जानलेवा साबित हो सकती है।

​सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर होगी बेदखली

​तकनीकी नियमावली के तहत 132 केवी लाइन के दोनों किनारों पर 27 मीटर तथा 220 केवी लाइन के दोनों ओर 35 मीटर तक किसी भी प्रकार का पक्का या कच्चा ढांचा खड़ा करना पूरी तरह गैरकानूनी है। विद्युत अधिनियम के तहत यह गलियारा केवल तारों के रखरखाव और स्पार्किंग से बचाव के लिए खाली छोड़ना अनिवार्य होता है। इन निर्धारित फासलों में रहने से न केवल हर समय भयावह करंट फैलने और जानमाल के खात्मे का खतरा मंडराता रहता है, बल्कि किसी बड़ी तकनीकी खराबी की स्थिति में समूचे शहर की विद्युत व्यवस्था भी ठप पड़ सकती है। प्रशासन अब इन सभी चिन्हित अवैध परिसरों को हटाने की रूपरेखा पर काम कर रहा है।

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak