जबलपुर। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के नर्मदापुरम स्थित 132 केवी सबस्टेशन सिवनी मालवा में तैनात आउटसोर्स सुरक्षा कर्मी आदर्श लावंशी, ऑपरेटर श्यामसुंदर गौर और नितिन कुमार गौर की सजगता से 40 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर का बुशिंग फेल्योर बच गया। रात्रिकालीन यार्ड गश्त के दौरान कर्मचारियों को मिली तकनीकी खराबी की सूचना पर अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश शांडिल्य के मार्गदर्शन, कार्यपालन अभियंता लक्ष्मण आर्य तथा सहायक अभियंता बी.पी. द्विवेदी की त्वरित तकनीकी जांच के चलते बड़ी दुर्घटना और आर्थिक नुकसान टल गया। इस उल्लेखनीय कार्य पर प्रबंध संचालक सुनील तिवारी ने तीनों फील्ड कर्मियों को पुरस्कृत करने की घोषणा की।
जांच में पकड़ी गई पावर ट्रांसफार्मर की खराबी
मध्यरात्रि की नियमित यार्ड गश्त के दौरान सुरक्षा कर्मी को ट्रांसफार्मर के पास से अप्रत्याशित ध्वनि सुनाई दी। उन्होंने बिना किसी देरी के कंट्रोल रूम में उपस्थित दोनों ऑपरेटरों को मौके पर बुलाया। तीनों कर्मचारियों ने मिलकर स्थिति को परखा और खतरे का सही अंदाजा लगाकर तुरंत उच्च तकनीकी अमले को पूरे मामले से अवगत कराया। सूचना मिलते ही अभियंताओं के दल ने लोड डिस्पैच सेंटर से संपर्क साधा। विद्युत तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए बिना समय गंवाए ट्रांसफार्मर का आपातकालीन शटडाउन लिया गया। इसके बाद की गई तकनीकी जांच में ट्रांसफार्मर बुशिंग के पैरामीटर पूरी तरह बिगड़े हुए मिले, जिससे स्पष्ट हो गया कि उपकरण आंतरिक रूप से खराब हो चुका था।
त्वरित तकनीकी फैसले से रुक गया बड़ा संकट
अधिकारियों ने समय रहते प्रभावित उपकरण को बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी। तकनीकी रूप से यह खराबी अगर अनदेखी रह जाती, तो तेज धमाके के साथ बुशिंग फट सकती थी। इससे आसपास आग लगने, लाखों रुपये के मुख्य उपकरण के पूरी तरह जलने और नर्मदापुरम अंचल की विद्युत आपूर्ति कई दिनों तक ठप होने का सीधा खतरा मंडरा रहा था।कंपनी स्तर पर फील्ड कर्मचारियों की इस तत्परता को कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल माना गया है। उच्च प्रबंधन ने माना कि जमीनी अमले का ऐसा दायित्वबोध पूरे विभाग की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाता है। समय पर की गई इस कार्रवाई से करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति सुरक्षित बच गई।
