जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में चल रहे आंतरिक प्रशासनिक तनाव और कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा के साथ अन्य अधिकारियों के तालमेल के अभाव का सीधा असर शैक्षणिक व्यवस्थाओं पर दिखाई दे रहा है। संस्था को लगातार सेवानिवृत्ति की कगार पर खड़े कुलसचिव मिल रहे हैं, जिसके कारण दैनिक कार्यप्रणाली बिगड़ चुकी है। इस अव्यवस्था के बीच विश्वविद्यालय ने सत्र 2025-26 के लिए संबद्ध महाविद्यालयों को वैधानिक संबद्धता पत्र यानी एफिलेशन सर्टिफिकेट दिए बिना ही परीक्षाएं आयोजित करा लीं। नियमानुसार छात्रों के प्रवेश, कक्षा संचालन और इम्तिहान से पहले संबद्धता का नवीनीकरण अनिवार्य रहता है। गंभीर बात यह सामने आई कि संबद्धता संबंधी औपचारिकता पूरी किए बिना ही आनन-फानन में परिणाम भी घोषित कर दिए गए हैं।
नियमों को ताक पर रखकर परिणाम घोषित किए
इस पूरी प्रक्रिया में उच्च शिक्षा के नियमों और मानकों की गंभीर अनदेखी दर्ज की गई है। वर्तमान में विश्वविद्यालय का नियमित शैक्षणिक कैलेंडर करीब 6 माह के विलंब से चल रहा है। जानकारों का आकलन है कि यदि अब पूरी निष्ठा से सुधार कार्य किया जाए, तब भी समय चक्र को पटरी पर लाने में कम से कम 2 आगामी सत्रों का समय लगेगा। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाने के दावों के बीच अंदरूनी खींचतान ने परीक्षा तंत्र को पूरी तरह से शिथिल कर दिया है।
बिना मान्यता डिग्रियों की वैधता पर उठे सवाल
संबद्धता की विधिक पुष्टि के अभाव में परीक्षाएं संपन्न कराने और अंकसूची तैयार करने की प्रक्रिया ने छात्र संगठनों व शिक्षाविदों में रोष भर दिया है। इस मनमाने निर्णय से हजारों छात्र-छात्राओं के भविष्य पर अनिश्चितता का साया गहरा गया है। विधिक विशेषज्ञों के मुताबिक भविष्य में किसी कानूनी या तकनीकी जांच की दशा में इन परीक्षाओं और जारी परिणामों के आधार पर मिलने वाली उपाधियों की कानूनी वैधता पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
