जबलपुर। आयुध निर्माणी बोर्ड के अधीन संचालित जबलपुर के जीसीएफ स्टेट स्थित ओएफके हायर सेकेंडरी स्कूल में बाउंड्रीवाल का निर्माण कराने के चक्कर में एक दर्जन हरे-भरे पेड़ों को काटकर गिरा दिया गया। स्कूल प्रबंधन द्वारा की गई इस मनमानी में वन विभाग से किसी भी तरह की अनापत्ति यानी एनओसी तक नहीं ली गई। काटे गए पेड़ों में प्रदेश सरकार द्वारा चिन्हित संरक्षित श्रेणी के बबूल और पलाश शामिल हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों की अनदेखी कर बिना किसी पूर्व स्वीकृति यह कृत्य किया गया है, जबकि अदालत ने नियमविरुद्ध कटाई पर कड़े कानूनी प्रावधान तय किए हैं।
हाईकोर्ट के दिशा निर्देश अनुसार होगी एफआईआर
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के तहत बिना वन विभाग की पूर्व अनुमति के पेड़ों को काटना संज्ञेय अपराध माना गया है। उच्च न्यायालय ने साफ निर्देश दिए हैं कि वन विभाग ऐसी अवैध कटाई की स्थिति में जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज करा सकता है। अदालत ने अपने न्यायिक आदेश में फिल्म पुष्पा की तर्ज पर सक्रिय तस्करों तथा व्यापारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई थी। इसी आधार पर संरक्षित पेड़ों की कटाई और उनके परिवहन के लिए अनुमति का दायित्व वन विभाग के ट्री ऑफिसर या रेंजर रैंक के अधिकारी को सौंपा गया है, जो जांच उपरांत जरूरी परमिट टीपी जारी करता है।
पर्यावरण संतुलन बिगड़ने से जनजीवन की सेहत पर असर
मध्य प्रदेश में वर्तमान समय में 50 प्रजाति के पेड़ों को संरक्षित सूची में रखा गया है, जिसमें बबूल, सागौन तथा पलाश प्रमुख रूप से दर्ज हैं। ग्रामीण इलाकों में यदि कोई वृक्ष कृषि भूमि पर भी लगा हो, तब भी उसे गिराने से पहले संबंधित ग्राम पंचायत विभाग की मंजूरी लेना अनिवार्य किया गया है। शिक्षण संस्थान के परिसर में भारी तादाद में पेड़ों को खत्म करने से स्थानीय पर्यावरण को सीधा नुकसान पहुंचता है। हरियाली छिनने के कारण इलाके में ऑक्सीजन का स्तर गिरता है, जिससे आसपास रहने वाले आम नागरिकों के स्वास्थ्य और प्रकृति के संतुलन पर गंभीर संकट पैदा होता है।
