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आउटसोर्स और संविदा कर्मियों को मिले कानूनी हक



जबलपुर। इंडियन नेशनल सैलरीड एम्पलाइज एवं प्रोफेशनल वर्कर्स फेडरेशन की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक विजय सिंह रघुवंशी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इसमें मुख्य अतिथि पूर्व वरिष्ठ अधिकारी श्रम कानून विशेषज्ञ अजय मिश्रा तथा विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय सचिव राकेश डीपी पाठक उपस्थित रहे। बैठक में महामंत्री रामराज तिवारी ने एजेंडा पेश किया, जिसका सभी पदाधिकारियों ने एकमत से समर्थन किया। इस अवसर पर नरेंद्र मिश्रा, राहुल त्रिपाठी, जीपी त्रिपाठी, पूर्व महाप्रबंधक सुमन लता डेहरिया, मिथिलेश तिवारी, एनके यादव, कमलेश सिंह, रंजन सिंह, उमाशंकर मेहता, आरके हर्ट, पवन मिश्रा, सुमित कुमार, उमेश पांडे और अफसार अहमद मौजूद रहे। वक्ताओं ने संगठित और असंगठित क्षेत्र के वेतनभोगी श्रमिकों के वेतन, कार्य समय, नियुक्ति पत्र, पेंशन तथा सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग उठाई।

​नई श्रम संहिताओं से तय होंगे कड़े नियम

​अजय मिश्रा ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त करके 21 नवंबर 2025 को नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं, जो 2026 से पूरी तरह प्रभावशील हो चुके हैं। इसके तहत वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दिवस संहिता 2020 शामिल हैं। मध्य प्रदेश शासन द्वारा तैयार नए नियम भी इसी सप्ताह जारी होने वाले हैं। किसी भी निजी, सरकारी अथवा एनसीएल, एनटीपीसी, अडानी और भेल जैसी इकाइयों में मासिक मानदेय पर कार्यरत हर व्यक्ति वेतनभोगी की श्रेणी में आता है। इन सभी को औपचारिक नियुक्ति पत्र और वेतन नियमों का संपूर्ण विवरण देना अनिवार्य है। नई व्यवस्था के अनुसार हर माह की 7 तारीख से पहले भुगतान न करने पर संस्थान को जुर्माना भरना होगा।

​शोषण रोकने के लिए बने पुख्ता नीति

​राकेश डीपी पाठक ने रेखांकित किया कि शासकीय और निजी उपक्रम पूरी तरह ठेका कर्मियों पर आश्रित हो चुके हैं। मध्य प्रदेश की विद्युत कंपनियों में 80 प्रतिशत से अधिक नियमित पदों के रिक्त होने के कारण उत्पादन, पारेषण, वितरण और जनसेवा जैसे सभी मुख्य दायित्व संविदा कर्मियों के कंधों पर हैं। इन महिला-पुरुष कामगारों को न्यूनतम पारिश्रमिक, अवकाश, ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य बीमा और कार्यस्थल पर बचाव के साधन नहीं मिल रहे हैं, जिसके समाधान हेतु ठोस नीति आवश्यक है। रामराज तिवारी ने सुझाव रखा कि पीएफ और ग्रेच्युटी के नुकसान से बचाव के लिए कुल वेतन संरचना में मूल वेतन का अनुपात 50 प्रतिशत रखा जाए। सुमन लता डेहरिया ने नागपुर और बेंगलुरु में प्राप्त प्रशिक्षण के आधार पर महिला उत्थान प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय स्तर पर मिले प्रथम स्थान का उल्लेख किया। जीपी त्रिपाठी, नरेंद्र मिश्रा और राहुल त्रिपाठी ने सदस्यता विस्तार का आह्वान किया, जबकि मिथिलेश तिवारी ने कृतज्ञता ज्ञापित की।

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