जबलपुर। दमोह नाका स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम का औचक निरीक्षण करते हुए नगर निगम आयुक्त अग्रिम कुमार ने तकनीकी निगरानी, प्रशासनिक पारदर्शिता तथा जनसुविधाओं को बेहतर करने के कड़े निर्देश जारी किए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने 3 दिनों में प्रत्येक वार्ड की डेटा आधारित समीक्षा रिपोर्ट तलब की। इस दौरान अपर आयुक्त देवेंद्र सिंह चौहान, अधीक्षण यंत्री कमलेश श्रीवास्तव, उपायुक्त संभव अयाची, स्वास्थ्य अधिकारी अभिनव मिश्रा और तकनीकी अधिकारी बालेंदु शुक्ला मौजूद रहे। निगमायुक्त ने स्पष्ट किया कि आधुनिक तंत्र केवल कागजी रिकॉर्ड के लिए नहीं, बल्कि जमीनी समस्याओं के त्वरित निपटारे के लिए है। स्वास्थ्य, जल और कर्मशाला विभाग को एकजुट होकर काम करने का आदेश देते हुए उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन, शिफ्ट व्यवस्था और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने पर सीधा बल दिया।
तकनीक से कसेगा फील्ड का हर ढीला पेंच
दमोह नाका केंद्र पहुंचे निगमायुक्त ने ऑन-ड्यूटी कंप्यूटर ऑपरेटरों से सीधा संवाद कर सॉफ्टवेयर संचालन और शिकायतों के ऑनलाइन निस्तारण की वास्तविक स्थिति परखी। उन्होंने कहा कि डिजिटल मॉनिटरिंग का प्राथमिक उद्देश्य मैदानी अमले की सक्रियता बढ़ाना और सार्वजनिक सेवाओं की गति तेज करना है। सभी कर्मचारियों के कार्य के घंटे और शिफ्ट का विभाजन स्पष्ट रूप से दर्ज रहेगा, जिससे किसी भी स्तर पर लापरवाही होने पर जवाबदेही तय की जा सके। इसके साथ ही आईटीएमएस के कैमरों से शहर की यातायात व्यवस्था, चौराहों के सिग्नल और सुरक्षा पहलुओं की निगरानी को पहले से अधिक मजबूत करने पर सहमति बनी। उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों के जरिए चौबीसों घंटे निगरानी रखने और ट्रैफिक जाम से जुड़ी दिक्कतों को फौरन हल करने की रणनीति बनाई गई।
कचरा ऊर्जा संयंत्र और फील्ड कार्यों की समीक्षा
कंट्रोल रूम की व्यवस्थाएं देखने के बाद नगर निगम प्रमुख ने वेस्ट टू एनर्जी प्लांट का रुख किया। वहां संयंत्र की संचालन क्षमता, कचरा निस्तारण की गति और बिजली उत्पादन प्रक्रिया की पड़ताल की गई। अधिकारियों को हिदायत दी गई कि प्लांट की तकनीकी खामियां दूर कर कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। 3 दिनों के भीतर तैयार होने वाली वार्डवार रिपोर्ट के जरिए स्वच्छता और पेयजल सप्लाई की कमियों को चिह्नित कर सीधे फील्ड स्तर पर समाधान निकाला जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य शाखा, पेयजल वितरण और कर्मशाला के वाहनों का आपसी तालमेल अनिवार्य किया गया है ताकि गाड़ियां समय पर कचरा उठाएं और पानी की टंकियां समय से भरें। तय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए नियमित समीक्षा बैठकें होंगी, जिससे नागरिकों को सीधे जमीनी स्तर पर राहत मिल सके।

