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सरकार की पहल से पहले ही एमपी ट्रांसको में स्थापित थी वंदे मातरम् के छहों छंदों के सामूहिक गायन की परंपरा

 
पिछले 6 सार्लो से प्रत्येक आधिकारिक बैठक और कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत के पूर्ण गायन से

जबलपुर। मध्यप्रदेश शासन द्वारा हाल ही में सरकारी एवं आधिकारिक बैठकों तथा कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के ससम्मान गायन को प्रोत्साहित करने और इसे प्रमुखता से लागू करने की पहल की गई है। राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मध्य प्रदेश सहित पूरे भारत में राष्ट्रीय गीत के सभी 6 छंदों के साथ सामूहिक वाचन किया जा रहा है, लेकिन मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) में यह परंपरा पिछले छह वर्षों से अधिक समय से निरंतर चली आ रही है।

एमपी ट्रांसको में सभी प्रमुख बैठकों, समीक्षा बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, संगोष्ठियों तथा अन्य आधिकारिक आयोजनों की शुरुआत राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सभी छह छंदों के सामूहिक गायन से की जाती है। समय के साथ यह केवल एक औपचारिकता नहीं रही, बल्कि संगठन की कार्यसंस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन गई है।

महिला अधिकारियों ने किया नेतृत्व

एमपी ट्रांसको में राष्ट्रगीत के छहों छंदों के शुद्ध एवं सामूहिक गायन की शुरुआत में महिला अधिकारियों और महिला कार्मिकों के समूहों ने विशेष रुचि लेते हुए इसमें दक्षता प्राप्त की। उनके प्रयासों से विभिन्न कार्यालयों में नियमित अभ्यास का वातावरण बना। बाद में पुरुष अधिकारी और कर्मचारी भी इस पहल से जुड़े तथा उन्होंने भी छहों छंदों के गायन में पारंगतता हासिल की। आज स्थिति यह है कि एमपी ट्रांसको के विभिन्न कार्यालयों और इकाइयों में ऐसे अनेक समूह तैयार हो चुके हैं जो बिना किसी लिखित संदर्भ के वंदे मातरम् के सभी छह छंदों का सामूहिक गायन करने में सक्षम हैं।

अन्य विद्युत कंपनियों के लिए भी बना उदाहरण

एमपी ट्रांसको की इस परंपरा को विद्युत क्षेत्र की अन्य संस्थाओं में भी सराहना मिली है। स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 2026 के अवसर पर मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में एमपी ट्रांसको की महिला कार्मिकों के एक समूह को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। इस अवसर पर उन्होंने वंदे मातरम् के सभी छह छंदों का सामूहिक वाचन एवं गायन प्रस्तुत किया, जिसकी व्यापक प्रशंसा हुई।

संगठनात्मक संस्कृति का हिस्सा बना राष्ट्रगीत

एमपी ट्रांसको के अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन की यह परंपरा कर्मचारियों में राष्ट्रीय चेतना, संगठनात्मक एकात्मता और सकारात्मक कार्य वातावरण को सुदृढ़ करने का माध्यम बनी है। यही कारण है कि पिछले छह वर्षों से अधिक समय से यह परंपरा निरंतर जारी है और कंपनी के प्रत्येक महत्वपूर्ण आधिकारिक आयोजन का नियमित अंग बन चुकी है।

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