जबलपुर। नवागत कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने जिले के ग्रामीण अंचलों का व्यापक दौरा कर विभिन्न शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन और विकास कार्यों की वस्तुस्थिति की गहन समीक्षा की। इस निरीक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत उन्होंने पनागर व सिहोरा जनपद क्षेत्र के सूखा, मंगेला, बेलखाड़ू, बघौड़ा के पिपरिया तथा जुझारी ग्रामों में पहुंचकर धान पंजीयन सत्यापन, सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण और स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री की प्रगति जांची। मौके पर मौजूद एसडीएम श्रीमती कलावती ब्यारे, एसडीएम श्रीमती ज्योति परस्ते, तहसीलदार नीरज तखरिया, सरपंच डॉ. रितेश सिंह ठाकुर और एनजीओ नवाचार समाज सेवी संस्थान की शिक्षिका दिव्या लोधी से उन्होंने सीधा संवाद स्थापित किया। प्रशासनिक अमले को आम जनता के पट्टा वितरण, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, ई-केवाईसी और फील्ड स्तर की समस्याओं के त्वरित समाधान के ठोस निर्देश दिए गए। साथ ही कक्षा 9वीं और 10वीं के अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों की विशेष शैक्षणिक व्यवस्था का मूल्यांकन भी संपन्न हुआ।
पनागर के सूखा में पट्टा वितरण निर्देश
कलेक्टर ने स्थानीय पंचायत भवन में बैठकर राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति देखी। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को स्पष्ट कहा कि पात्र ग्रामीणों को आवासीय पट्टे देने में किसी भी प्रकार का विलंब न किया जाए। बुजुर्गों और असहाय व्यक्तियों की पेंशन से जुड़े प्रकरणों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मौके पर ही आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराई जाए।
मंगेला और बेलखाड़ू में ई-केवाईसी अभियान
दूसरे पड़ाव में उन्होंने क्षेत्रीय अमले को निर्देशित किया कि वे घर-घर पहुंचकर शेष रहे सभी पात्र किसानों का शत-प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण कराएं। बेलखाड़ू में कार्य को गति देने के उद्देश्य से पटवारी और ग्राम कोटवार के आपसी तालमेल से रजिस्ट्री का काम समय-सीमा में निबटाने की व्यवस्था तय की गई।
पिपरिया में दुर्गा पंडाल समीक्षा बैठक
ग्राम बघौड़ा के अंतर्गत आने वाले पिपरिया में स्थापित दुर्गा पंडाल पहुंचकर राजस्व अभिलेखों का सूक्ष्म परीक्षण किया गया। स्थानीय पटवारी द्वारा प्रस्तुत की गई प्रगति रिपोर्ट पर संतुष्टि व्यक्त करते हुए उनके मैदानी प्रयासों की खुले तौर पर प्रशंसा की गई और गति निरंतर बनाए रखने को कहा गया।
जुझारी में छात्र संवाद एवं मार्गदर्शन
सिहोरा विकासखंड के ग्राम जुझारी स्थित पंचायत भवन में कलेक्टर ने बोर्ड कक्षाओं में अनुत्तीर्ण रहे छात्र-छात्राओं से आत्मीय चर्चा की। उन्होंने बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाते हुए लगन से पुन: अध्ययन करने की सीख दी तथा कक्षा संचालन के लिए प्रकाश, बैठक और पाठ्य सामग्री से जुड़ी व्यवस्थाएं परखीं।

