जबलपुर। देश की 41 आयुध निर्माणियों के 59,318 रक्षा असैनिक कर्मचारियों में से 59,033 कर्मियों यानी 99.51 प्रतिशत ने 15 अक्टूबर 2026 तक केंद्र सरकार के कर्मचारी बने रहने का चयन किया है। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज़ फेडरेशन यानी एआईडीईएफ के अनुसार 7 नए रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों में स्थायी संविलियन का रास्ता केवल 123 लोगों ने चुना, जबकि विभिन्न कारणों से 92 कामगार अपनी पसंद दर्ज नहीं करा सके। संगठन के अध्यक्ष एसएन पाठक और महासचिव सी. श्रीकुमार ने इसे निगमीकरण की नीति के खिलाफ कर्मचारियों का सीधा फैसला बताया है। यूनियन ने कहा कि जब तक कर्मचारी खुद स्थायी रूप से नए निगमों में जाना स्वीकार नहीं करते, तब तक वे सरकारी सेवक ही रहेंगे।
मद्रास उच्च न्यायालय में मिला था लिखित भरोसा
भारत सरकार ने वर्ष 2021 में तत्कालीन आयुध निर्माणी बोर्ड को समाप्त करके सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में बांट दिया था। उस समय केंद्र के इस कदम का एआईडीईएफ ने कड़ा विरोध किया और पूरे मामले को मद्रास उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी। अदालती कार्यवाही के दौरान सरकार ने लिखित तौर पर यह बात स्वीकार की थी कि सभी मौजूदा रक्षा असैनिक कामगार केंद्र सरकार के मुलाजिम ही बने रहेंगे। उनके दर्जे को नए निगमों में केवल प्रतिनियुक्ति के रूप में देखा जाएगा, बशर्ते वे खुद नए उपक्रमों में पूर्ण विलय का चुनाव न कर लें।
अधिसूचना के बाद सामने आई एकजुट तस्वीर
प्रशासन ने इस व्यवस्था को औपचारिक रूप देने के मकसद से 15 जून 2026 को विकल्प चयन की आधिकारिक अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत कर्मचारियों को स्पष्ट करना था कि वे पूर्ववत सरकारी सेवा का हिस्सा रहना चाहते हैं अथवा डीपीएसयू में समाहित होना पसंद करेंगे। निर्धारित मियाद पूरी होने पर आए आंकड़ों ने साफ कर दिया कि फैक्ट्री कामगार निगमीकरण व्यवस्था में शामिल होने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं। वे अपनी पुरानी सिविल सेवा पहचान को ही सुरक्षित रखना चाहते हैं। फेडरेशन के दोनों प्रमुख पदाधिकारियों ने इस दृढ़ता पर देश भर के असैनिक साथियों को बधाई दी और नई दिल्ली स्थित हुकूमत से अपील की कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए उनकी वैधानिक रक्षा सेवा स्थिति को अक्षुण्ण रखा जाए।
