नई दिल्ली। रेलवे बोर्ड ने कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और विधवा पास धारकों को राहत देते हुए प्रीमियम ट्रेनों में उच्च श्रेणी में यात्रा की अनुमति दे दी है। अब विशेषाधिकार पास (पीपी), सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले मानार्थ पास (पीआरसीपी) और विधवा पास (डब्ल्यूपी) के धारक राजधानी, दुरंतो और शताब्दी जैसी ट्रेनों में अपनी निर्धारित पात्रता से ऊपर की श्रेणी में सफर कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें केवल दोनों श्रेणियों के किराये का अंतर चुकाना होगा।
किन पास धारकों को मिलेगा फायदा?
यह सुविधा तीन श्रेणियों के पास धारकों को मिलेगी। इनमें कार्यरत रेलवे कर्मचारियों को जारी विशेषाधिकार पास, सेवानिवृत्त रेलकर्मियों को मिलने वाला मानार्थ पास और रेलवे कर्मचारियों की विधवाओं को जारी विधवा पास शामिल हैं। संबंधित पास धारक निर्धारित पात्रता से ऊंची श्रेणी में यात्रा के लिए किराये का अंतर देकर टिकट ले सकेंगे।
पहले क्या था असमंजस?
रेलवे सेवक पास नियम, 1986 के तहत कर्मचारियों, उनके परिवारों और आश्रितों को मुफ्त या रियायती रेल यात्रा की सुविधा मिलती है। हालांकि, राजधानी, दुरंतो और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों में पात्रता से ऊंची श्रेणी में अतिरिक्त किराया देकर यात्रा करने की अनुमति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
रेलवे बोर्ड ने क्या किया स्पष्ट?
इस मामले में रेलवे बोर्ड ने वाणिज्य निदेशालय से परामर्श के बाद अनुमति स्पष्ट की है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, रेलवे सेवक पास नियम, 1986 की अनुसूची-दो के नियम 3(एक्स) के तहत पीपी, पीआरसीपी और डब्ल्यूपी धारकों को किराये का अंतर चुकाकर उच्च श्रेणी में यात्रा करने की सुविधा दी गई है। इससे पात्र पास धारकों को प्रीमियम ट्रेनों में अपनी जरूरत के मुताबिक उच्च श्रेणी चुनने का विकल्प मिलेगा।
