जबलपुर। मध्य प्रदेश के कई शहरों में स्वाइन फ्लू के पैर पसारने के बीच जबलपुर में भले ही राहत की सांस ली जा रही हो, लेकिन स्वास्थ्य महकमे ने साफ कर दिया है कि खतरा अभी टला नहीं है। जिले में अब तक भेजे गए सभी 24 संदिग्ध मरीजों के नमूनों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है, फिर भी बदलते मौसम और अस्पतालों में उमड़ रही भीड़ को देखते हुए निगरानी का दायरा और कड़ा कर दिया गया है। निजी नर्सिंग होम से रेफर होकर आए इन मरीजों के थ्रोट स्वाब सैंपल नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में जांचे गए थे। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी का कहना है कि वर्तमान में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन मौसमी उतार-चढ़ाव को देखते हुए बिल्कुल भी ढिलाई नहीं बरती जा सकती। मेडिकल कॉलेज की मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. ऋतु गुप्ता के मुताबिक मौसमी वायरल का जोर काफी अधिक है। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर दिन 800 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं, वहीं जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज को मिलाकर मौसमी विकारों के 300 से अधिक पीड़ित प्रतिदिन इलाज के लिए आ रहे हैं। वायरल बुखार के इस भारी दबाव के कारण एच1एन1 वायरस के फैलाव की आशंका लगातार बनी हुई है।
अस्पतालों में बेकाबू भीड़ और निजी लैब की अवैध वसूली पर नजर
अस्पतालों की ओपीडी में पहुंच रहे अधिकांश मरीजों में तेज ज्वर, सूखी खांसी, गले में तीव्र खराश, असहनीय बदन दर्द और सांस खींचने में परेशानी जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग का स्पष्ट निर्देश है कि स्वाइन फ्लू की आधिकारिक पुष्टि केवल तय सरकारी गाइडलाइन और प्रोटोकॉल के तहत ही मान्य होगी। किसी भी प्राइवेट अस्पताल या निजी पैथोलॉजी सेंटर को इस बीमारी की पुष्टि करने की कानूनी मान्यता नहीं दी गई है। संदिग्धों की जांच केवल सरकारी निगरानी में आईसीएमआर पंजीकृत प्रयोगशालाओं में ही कराई जाती है। प्रशासन को शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ निजी संस्थान वायरल के मरीजों में बीमारी का खौफ पैदा करके महंगे और गैर-जरूरी टेस्ट कराने का दबाव बना रहे हैं। स्वास्थ्य अमला ऐसे मुनाफाखोरों पर पैनी नजर रखे हुए है और नागरिकों को आगाह किया गया है कि वे घबराहट में आकर निजी सेंटरों पर अपनी गाढ़ी कमाई बर्बाद न करें।
हवा से फैलने वाले वायरस से कमजोर इम्युनिटी वालों को भारी जोखिम
चिकित्सकों के अनुसार एच1एन1 इंफ्लूएंजा ए वायरस मुख्य रूप से सांस नलिकाओं पर हमला करता है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों के जरिए हवा में तेजी से फैलता है। भले ही शुरुआती 24 रिपोर्ट नेगेटिव रही हों, लेकिन यदि किसी पीड़ित में कंपकंपी, तेज बुखार, लगातार उल्टी-दस्त, भीषण सिरदर्द और सांस का उखड़ना जैसे गंभीर लक्षण उभरते हैं, तो उसे तत्काल डॉक्टरी परामर्श की दरकार होती है। सामान्य लक्षण वाले मरीजों को सिर्फ दवा लेकर घर पर पूरा आराम करने की हिदायत दी गई है। सबसे ज्यादा खतरा वृद्धजनों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, अस्थमा, दिल के रोगियों और डायबिटीज से ग्रस्त लोगों को है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर होती है। बचाव के लिए बार-बार साबुन से हाथ साफ करना, सार्वजनिक स्थानों पर अनिवार्य रूप से मास्क लगाना और भीड़भाड़ से दूरी बनाए रखना ही एकमात्र ढाल है।
