जबलपुर। मंडला जिले के आधिकारिक दौरे पर पहुंचे जबलपुर संभाग के लोक शिक्षण संयुक्त संचालक घनश्याम सोनी ने शैक्षणिक गतिविधियों, नेशनल मीन्स कम मेरिट स्कॉलरशिप परीक्षा और छात्र कल्याण से जुड़ी व्यवस्थाओं की सघन समीक्षा की। इस निरीक्षण कार्यक्रम में शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मंडला, शासकीय रानी अवंती बाई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मंडला, व्यावसायिक शिक्षा प्रयोगशाला एवं आवासीय छात्रावास प्रमुख केंद्र रहे। अधिकारी ने मौके पर तैनात प्रशासनिक अमले व प्राचार्यों से संवाद स्थापित कर विद्यार्थियों के दैनिक शैक्षणिक स्तर, कक्षीय अनुशासन, प्रायोगिक अभ्यास और शासन द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति जानी। उन्होंने संपूर्ण तंत्र को छात्र केंद्रित बनाने तथा शिक्षण गुणवत्ता को आधुनिक मापदंडों के अनुसार ढालने के स्पष्ट निर्देश जारी किए।
परीक्षा केंद्र व्यवस्था और छात्र सुविधाओं का निरीक्षण
एनएमएमएस मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित एवं अनुशासित बनाने के लिए केंद्र प्रभारियों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान कक्षों में बैठक व्यवस्था, प्रकाश, पेयजल और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल की बिंदुवार पड़ताल हुई। इसी कड़ी में आवासीय परिसर का दौरा कर वहां निवासरत बालक-बालिकाओं के शयन कक्ष, भोजन कक्ष और प्रसाधन क्षेत्रों की स्वच्छता स्थिति जांची गई। संयुक्त संचालक ने भोजन की पोषण गुणवत्ता नियमित अंतराल पर परखने और परिसर में शुद्ध पेयजल की सतत आपूर्ति बनाए रखने की ताकीद की। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवासीय परिसर का सुरक्षित, शांत और तनावमुक्त परिवेश ही शिक्षार्थियों के मानसिक विकास का आधार बनता है, अतः बुनियादी सुविधाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
प्रायोगिक तकनीकी कौशल और उत्कृष्ट शालाओं का अवलोकन
किताबी ज्ञान को आजीविका से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित व्यावसायिक शिक्षा प्रयोगशाला में उपलब्ध तकनीकी मशीनरी, औजारों और प्रायोगिक सामग्री का तकनीकी परीक्षण किया गया। प्रयोगशाला प्रभारी को निर्देशित किया गया कि छात्रों को केवल सैद्धांतिक पाठ पढ़ाने के बजाय कार्यशालाओं में हाथों से काम सिखाने पर जोर दिया जाए, ताकि भविष्य में वे स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भर बन सकें। इसके उपरांत दोनों प्रमुख उच्चतर माध्यमिक शालाओं के निरीक्षण में शिक्षकों की दैनंदिनी, छात्रों की वास्तविक उपस्थिति पंजिका और पाठ्यक्रम की प्रगति का मिलान किया गया। शाला प्रबंधन को निर्देश दिए गए कि कमजोर बच्चों के लिए उपचारात्मक कक्षाएं लगाई जाएं, जिससे वार्षिक बोर्ड परिणामों में संभाग स्तर पर श्रेष्ठ प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके।

