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धर्मशास्त्र विवि में भर्तियों का गणित उलझा, योग्यता और आरक्षण पर तीखी तकरार



जबलपुर। धर्मशास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में वर्ष 2021 की संविदा नियुक्तियों और 15 जुलाई 2026 को जारी नियमित भर्ती विज्ञापन को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। आउटसोर्स पर्यवेक्षक आशीष पाठक ने कुलगुरु डा. मनोज सिन्हा को विस्तृत शिकायती पत्र सौंपकर पूरी चयन व्यवस्था की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी है। शिकायतकर्ता का दावा है कि पहले संविदा और आउटसोर्स पर सेवाएं दे चुके चुनिंदा कार्मिकों को मौजूदा नियमित प्रक्रिया में पिछले दरवाजे से लाभ दिलाने की तैयारी चल रही है। इस औपचारिक पत्र में आरक्षण रोस्टर, आयु सीमा, शैक्षणिक अहर्ता, साक्षात्कार के आधार और कुलसचिव पद की पदस्थापना समेत विश्वविद्यालय के संशोधित सेवा नियमों की विधिक व प्रशासनिक समीक्षा की मांग उठाई गई है।

​नियमों में मनमाने बदलाव की स्वतंत्र जांच जरूरी

​शिकायतकर्ता ने दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया है कि वर्ष 2021 के दौरान पर्सनल असिस्टेंट तथा सहायक ग्रेड-3 जैसे लिपिकीय पदों पर की गई संविदा भर्तियों में तय गाइडलाइन का उल्लंघन हुआ। इन पदों पर नियुक्ति के लिए कंप्यूटर डिप्लोमा, सीपीसीटी और स्टेनोग्राफी की पूर्व निर्धारित योग्यताओं को दरकिनार किया गया। सहायक ग्रेड-3 के 7 संविदा पदों को भरते समय तय आरक्षण प्रावधानों का विधिवत पालन नहीं किया गया, जिसके कारण योग्य आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी चयन से वंचित रह गए। इसके अलावा वर्ष 2021 में हुए सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर चयन में तकनीकी दक्षता परीक्षा आयोजित करने के स्थान पर केवल मौखिक साक्षात्कार को ही अंतिम चयन का आधार बना दिया गया, जिससे चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गहरे प्रश्नचिह्न लगे।

​सक्षम जांच एजेंसी से चयन कराने का आग्रह

​नियमित विज्ञापन की समीक्षा करते हुए यह रेखांकित किया गया है कि पर्सनल असिस्टेंट, सहायक ग्रेड-3 और ब्वॉयज हॉस्टल सुपरवाइजर सहित कई रिक्तियों की पात्रता शर्तों में बड़े बदलाव किए गए हैं। कुलसचिव की नियुक्ति में भी निर्धारित योग्यता व आवश्यक कार्य अनुभव के मानकों के पालन की जांच कराने का आग्रह किया गया है। आरोप है कि सेवा नियमों में संशोधन करने से पहले विषय विशेषज्ञों और संबंधित हितधारकों से कोई विचार-विमर्श या जरूरी सुझाव नहीं लिए गए। पूर्व की शिकायतों के कारण स्वयं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताते हुए मांग की गई है कि नियमों का उल्लंघन मिलने पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए तथा भविष्य की सभी नियमित भर्तियां किसी अधिकृत एवं सक्षम परीक्षा एजेंसी के माध्यम से संपन्न कराई जाएं। उधर कुलगुरु डा. मनोज सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान भर्ती प्रक्रिया अभी बेहद प्रारंभिक चरण में है और इसे पूर्णतः पारदर्शी ढंग से ही पूरा कराया जाएगा।

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