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8वें वेतन आयोग के सामने रखी गईं 9 बड़ी मांगें, सिर्फ सैलरी नहीं, पेंशन से इलाज तक की डिमांड

नई दिल्ली. केंद्र सरकार के कर्मचारी हों या पेंशनभोगी, 8वें वेतन आयोग को लेकर सबकी नजर अब उन मांगों पर टिकी है जो आयोग के सामने रखी गई हैं. संगठनों की सूची में सिर्फ तनख्वाह बढ़ाने की बात नहीं है. पुरानी पेंशन से लेकर इलाज, बच्चों की पढ़ाई और रेलवे कर्मचारियों के जोखिम भरे काम के भत्ते तक, कई पुराने सवाल इस बार फिर उठे हैं. इनका असर करीब 45 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ सकता है.

सरकार ने करीब छह महीने पहले आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी. तब से आयोग अलग अलग शहरों में संगठनों से मिल रहा है. मांगों को सरकार तक पहुंचाने में नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (एनसी-जेसीएम) की अहम भूमिका है, जिसकी अध्यक्षता कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन कर रहे हैं. अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, पर बड़ी मांगें मानी गईं तो वेतन, भत्तों और रिटायरमेंट लाभ में बड़ा बदलाव हो सकता है.

वेतन आयोग के सामने रखी गईं 9 बड़ी मांगें

1. पुरानी पेंशन की वापसी

2004 के बाद नौकरी में आए कर्मचारी फिलहाल एनपीएस के दायरे में हैं. संगठन चाहते हैं कि उनके लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल हो, ताकि रिटायरमेंट के बाद तय पेंशन मिले.

2. कैशलेस इलाज

कर्मचारी और पेंशनर चाहते हैं कि इलाज के लिए पहले अपनी जेब से बड़ी रकम न देनी पड़े. रिटायरमेंट के बाद बढ़ते मेडिकल खर्च को देखते हुए यह मांग पेंशनरों के लिए खास है.

3. बच्चों की पढ़ाई पर ज्यादा राहत

शिक्षा भत्ता और हॉस्टल सब्सिडी को पोस्ट ग्रेजुएशन तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया है, ताकि उच्च शिक्षा का खर्च उठा रहे परिवारों को सहारा मिले.

4. ग्रेच्युटी और फैमिली पेंशन में सुधार

डेथ कम रिटायरमेंट ग्रेच्युटी, फैमिली पेंशन और कम्युटेड पेंशन के लाभ बढ़ाने की मांग है. कटी हुई पेंशन 12 साल बाद बहाल करने का प्रावधान बेहतर ढंग से लागू करने को भी कहा गया है.

5. न्यूनतम वेतन का नया फॉर्मूला

परिवार के खर्च का आधार तय करने वाला मापदंड 3 से बढ़ाकर 3.6 यूनिट करने का सुझाव है. यह श्रम मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर आधारित बताया गया है.

6. प्रमोशन न मिलने पर एमएसीपी में बदलाव

संगठनों ने एमएसीपी योजना की विसंगतियां दूर करने और वेतन के कुछ स्तरों को मिलाकर बेहतर ढांचा बनाने की मांग की है.

7. रेलवे कर्मियों को जोखिम भत्ता

रेलवे के काम में कठिन हालात और जोखिम शामिल रहते हैं. इसी को देखते हुए रेलवे कर्मचारियों के लिए अलग जोखिम और कठिनाई भत्ते की मांग उठी है.

8. डिफेंस सिविलियन कर्मियों के लिए बीमा और भत्ता

हथियार, बारूद, कैमिकल या विस्फोटक संभालने वाले सिविलियन कर्मचारियों के लिए विशेष जोखिम भत्ता और इंश्योरेंस कवर की मांग की गई है.

9. आयोग का दायरा बढ़ाने की मांग

ग्रामीण डाक सेवकों, अर्धसैनिक बलों और केंद्रीय स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों को भी शामिल करने का सुझाव है. संगठनों के मुताबिक 7वें वेतन आयोग में इन्हें जगह नहीं मिली थी.

अब आगे क्या हो सकता है

इन मांगों का मतलब यह नहीं कि सब मंजूर हो गई हैं. 7वें वेतन आयोग को लागू करने में सरकार पर 2016 17 में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त बोझ पड़ा था. सुझावों की समीक्षा कार्मिक विभाग (डीओपीटी) और वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग करेगा, फिर अंतिम प्रस्ताव कैबिनेट के सामने जाएगा. आयोग की शर्तें तय करने की प्रक्रिया भी जारी है.

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