जबलपुर। त्योहारों के दौर में जबलपुर में 30 हजार लीटर दूध से केवल 1500 किलो घी बन पा रहा है, जबकि खपत 3000 किलो पार पहुंच गई है। बाजारों में 25 से 40 रुपए की चाट, गक्कड़-भर्ता और लड्डू में असली घी का दावा हो रहा है, जबकि शुद्ध माल 900 से 1000 रुपए किलो बिकता है। इस बड़े फासले के बीच खाद्य सुरक्षा अधिकारी देविका सोनवाने ने नमूनों को जांच हेतु भोपाल प्रयोगशाला भेजा है। पूर्व में अगस्त 2026 में डी-मार्ट और ब्लिंकिट से 215 किलो माल जब्त हुआ था। अक्टूबर 2025 में गोरखपुर सीएसपी टीम ने हाथीताल में तरुण गुप्ता के ठिकाने और गंगानगर दुकान पर डालडा मिलावट पकड़ी थी। जनवरी 2021 में रांझी बड़ा पत्थर से 500 किलो घी, फरवरी 2021 में माढ़ोताल थाने में विजय कुकरेजा पर मामला और सितंबर 2020 में गुप्तेश्वर बस्ती से 50 किलो सामग्री पकड़ी गई थी।
कार्रवाई के पुराने रिकॉर्ड से गहराता संदेह
शहर के विभिन्न क्षेत्रों में समय-समय पर पकड़े गए मामले बताते हैं कि मांग बढ़ते ही अमानक उत्पाद खपाने का अवैध खेल सक्रिय हो जाता है। खुले बाजार में मिलने वाले सामान के अलावा डिब्बाबंद उत्पादों की विश्वनीयता पर भी नजर रखने की आवश्यकता है। केवल रजिस्टर्ड दुकानों तक सीमित न रहकर उन गुप्त गोदामों की पड़ताल जरूरी है जहां से कम लागत वाला सिंथेटिक माल लाकर सीधे हलवाइयों और ठेले वालों तक पहुंचाया जाता है। मैदानी अमले को त्योहार पर विशेष तौर पर सतर्क रहना होगा ताकि आम नागरिक की थाली तक पहुंचने वाला भोजन सुरक्षित रहे।
प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई
प्रशासनिक टीम द्वारा संकलित किए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के पश्चात दोषियों के विरुद्ध अदालत में सीधे वाद दायर किए जाएंगे। वर्तमान में जांच प्रक्रिया को गति देने के साथ-साथ उन ट्रांसपोर्ट मार्गों की भी निगरानी की जा रही है जहां से बाहर के जिलों से सस्ता माल मंगाया जाता है। नागरिकों को जागरूक रहने की सलाह दी गई है कि अत्यधिक सस्ती दरों पर मिलने वाले तथाकथित देसी घी के झांसे में न आएं और प्रामाणिक स्रोतों से ही खरीदारी करें। खाद्य सुरक्षा तंत्र का प्रयास है कि पर्व के उल्लास में मिलावटखोर किसी की सेहत से खिलवाड़ न कर सकें।
