जबलपुर। शहर के प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्र खजरी खिरिया में बिजली कंपनी के गैरजिम्मेदाराना रवैये ने उद्यमियों का जीना दूभर कर दिया है। चौबीस घंटे के भीतर 10 से 15 बार बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली बंद होना यहां की रोजमर्रा की नियति बन चुका है। विद्युत आपूर्ति के इस चरमराती व्यवस्था के लिए अधीक्षण यंत्री सिटी संजय अरोरा, सहायक यंत्री सन्तोष कुटे, जेई सुनील पटेल और लाइनमैन मोहन ठाकुर की कार्यशैली को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। ये सभी क्षेत्रीय अधिकारी और तकनीकी अमला व्यवस्था सुधारने के बजाय अपनी आंखें मूंदे बैठे हैं। जिम्मेदार अमले की लापरवाही से तंग आकर अब क्षेत्रीय व्यापारियों ने सीधे भोपाल जाकर मुख्यमंत्री के समक्ष इस नाकारा तंत्र की पोल खोलने का फैसला लिया है। चीफ इंजीनियर एसके गिरिया ने माना है कि आपूर्ति बाधित होना गंभीर मामला है और यदि अमले ने जानबूझकर ऐसा किया तो कड़ी कार्रवाई होगी। दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि मैदानी अफसरों के झूठे आश्वासनों से त्रस्त होकर खून के आंसू रो रहे व्यापारी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
मशीनों के पहिए थमे कच्चा माल हो रहा बर्बाद
उत्पादन इकाइयों में बार-बार ट्रिपिंग होने से स्वचालित संयत्र अचानक बंद पड़ जाते हैं। प्रोसेस में चल रहा कच्चा माल पल भर में बर्बाद हो जाता है जिससे लाखों की सीधी चपत लग रही है। जब बिजली ही नहीं रहती तो कारखानों में तैनात दैनिक मजदूर घंटों निठल्ले बैठे रहने को मजबूर हैं। उत्पादन शून्य होने के बाद भी फैक्ट्री मालिकों को उनकी पूरी दिहाड़ी अपनी जेब से चुकानी पड़ रही है। इस बदहाली ने पूरे क्षेत्र के औद्योगिक पहिये को पूरी तरह जाम कर दिया है।
जेनरेटर के भारी डीजल खर्च से वित्तीय संकट
बिजली गुल होने पर काम चालू रखने के लिए महंगे ईंधन से जेनरेटर चलाना मजबूरी बन गया है। प्रतिमाह भारी-भरकम बिजली बिल का नियमित भुगतान करने के बाद भी अतिरिक्त डीजल खरीदने में पूंजी खत्म हो रही है। इस अप्रत्याशित खर्च ने उत्पादन लागत को आसमान पर पहुंचा दिया है जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा करना असंभव हो गया है। आर्थिक तंगी से घिरकर कई छोटे उद्यमियों ने अब अपनी इकाइयां स्थायी तौर पर बंद करने का मन बना लिया है।
सिर्फ वसूली में सख्ती दिखाता है अमला
माह का बिजली बिल तनिक भी लेट होने पर कनेक्शन काटने का खौफ दिखाने वाला अमला फॉल्ट सुधारने में पूरी तरह नकारा साबित हुआ है। तकनीकी खराबी या मेंटेनेंस के नाम पर उपभोक्ता जब भी संपर्क करते हैं तो अधिकारी गोलमोल जवाब देकर जिम्मेदारी से भागते हैं। बिल वसूली में फुर्ती और सुचारु आपूर्ति देने में सुस्ती के इस दोहरे चरित्र ने हर वर्ग के व्यापारी को भीतर तक झकझोर दिया है।
झूठे आश्वासनों से आजिज व्यापारी करेंगे सीधी शिकायत
अधीक्षण यंत्री से लेकर लाइनमैन तक सब व्यवस्था जल्दी दुरुस्त होने का पुराना बयान रटा-रटाया दोहरा रहे हैं। जमीनी स्तर पर सुधार का एक भी ठोस कदम नहीं उठाया गया जिससे आक्रोश भड़क उठा है। खोखले दावों से आजिज आकर व्यापारियों ने अब स्थानीय स्तर पर गुहार लगाना बंद कर दिया है। संभाग स्तर के अफसरों की इस मनमानी और अनदेखी का पूरा कच्चा चिट्ठा साक्ष्यों सहित सीधे शासन स्तर पर पेश किया जाएगा।
