जबलपुर। भोपाल की राज्य उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने बुरहानपुर में पदस्थ सब इंस्पेक्टर अमिताभ प्रताप सिंह उर्फ अमिताथ थियोफिलस का अनुसूचित जनजाति वर्ग का प्रमाण पत्र पूर्णतः निरस्त कर दिया है। यह कदम कोलार रोड निवासी प्रमिला तिवारी उपाध्याय की अक्टूबर 2024 की लिखित शिकायत पर उठाया गया है। शिकायत में खुलासा हुआ था कि उक्त पुलिस कर्मी ने वर्ष 1997-98 में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व जबलपुर कार्यालय के जावक क्रमांक 6745/बी121/1997-98 के जरिए गोंड जाति का जाली दस्तावेज हासिल कर शासकीय सेवा पाई थी। तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना के निर्देश पर एसडीएम रांझी आरएस मरावी तथा डीएसपी विजय सिंह गोठरिया द्वारा प्रस्तुत संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर समिति अध्यक्ष एवं आयुक्त तरुण राठी ने यह सख्त फैसला सुनाया है।
प्राथमिक विद्यालय के अभिलेखों ने खोली पूरी पोल
प्रशासनिक टीम ने पड़ताल में पाया कि उसने 1 जुलाई 1980 को स्मॉल चिल्ड्रन स्कूल एकेडमी में दाखिला लिया था। उस समय पंजीयन फॉर्म पर धर्म क्रिश्चियन तथा जाति एसटी गोंड दर्ज कराई गई थी। सन 1980 से पूर्व उसके खानदान का कोई भी सरकारी रिकॉर्ड इस वर्ग से जुड़ा नहीं मिला। इसके अतिरिक्त 1950 में जबलपुर के आसपास पूर्वजों के निवास का दावा जमीनी तफ्तीश में पूरी तरह झूठा निकला। आरोपी अपने बयानों के समर्थन में कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सका। साथ ही उसका पारिवारिक रहन-सहन, वैवाहिक परंपराएं और धार्मिक रीतियां मूल जनजातीय समाज से सर्वथा भिन्न पाई गईं।
गोरखपुर से बना दूसरा दस्तावेज भी हुआ निरस्त
समिति ने वर्ष 2024 में जबलपुर के गोरखपुर अनुभाग सिविल लाइन क्षेत्र से हासिल दूसरा प्रमाण पत्र भी फौरन प्रभाव से शून्य कर दिया है। इस दोहरे अभिलेख के निरस्तीकरण की फाइल गृह विभाग को सौंप दी गई है, जिससे अब सेवा समाप्ति एवं आपराधिक प्रकरण का रास्ता साफ हो चुका है।
