जबलपुर। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर आयोजित नेशनल लोक अदालत में मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने ऐतिहासिक सफलता दर्ज की। जबलपुर, सागर, रीवा एवं शहडोल क्षेत्र में कुल 18,048 बिजली मामलों का आपसी सुलह से निपटारा हुआ। इन प्रकरणों से जुड़े कुल 32.07 करोड़ रुपये का समाधान निकाला गया। कंपनी के खजाने में 19.60 करोड़ रुपये जमा हुए, जबकि बिजली उपभोक्ताओं को 5.43 करोड़ रुपये की विशेष छूट मिली। इसके साथ ही 4.02 करोड़ रुपये ब्याज तथा 3.01 करोड़ रुपये चक्रवृद्धि राशि का समायोजन किया गया। इस विधिक पहल से हजारों उपभोक्ताओं को अदालती चक्करों और लंबे विवादों से हमेशा के लिए स्थायी मुक्ति मिल गई।
उपभोक्ताओं को मिली करोड़ों की वित्तीय छूट
बिजली कंपनी ने राजस्व वसूली के साथ-साथ उपभोक्ताओं को राहत देने की नीति पर विशेष जोर दिया। अदालत की चौखट पर पहुंचे बिना आपसी सहमति से 15,269 प्री-लिटिगेशन मामलों का फैसला कराया गया, जिसके तहत 15.02 करोड़ रुपये की राशि का निबटारा हुआ। वहीं विभिन्न न्यायालयों में पहले से विचाराधीन 2,779 मुकदमों में दोनों पक्षों ने बैठकर 4.59 करोड़ रुपये का विवाद समाप्त किया। लोक अदालत का मूल मकसद बिना कटुता के उपभोक्ताओं को आर्थिक रियायतें देकर कानूनी झंझटों को खत्म करना था। कई सालों से उलझे प्रकरणों में ब्याज और अधिभार माफ होने से आम नागरिकों ने बकाया चुकाने में गहरी रुचि दिखाई।
चारों संभागों में अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
कंपनी कार्यक्षेत्र के चारों संभागों में फील्ड अमले ने सक्रिय भागीदारी निभाई। प्रकरणों की संख्या में जबलपुर क्षेत्र सबसे आगे रहा, जहां 7,252 मामले सुलझाए गए और 6.35 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। सागर संभाग में 3,646 मामलों का समाधान कर 3.89 करोड़ रुपये की वसूली हुई। रीवा संभाग ने राजस्व प्राप्ति में पहला स्थान हासिल कर 5,533 प्रकरणों से 7.91 करोड़ रुपये की सबसे बड़ी राशि जुटाई। शहडोल संभाग में 1,617 मामलों का निस्तारण करते हुए 1.45 करोड़ रुपये जमा कराए गए। वृत्त स्तर पर कैंप लगाकर उपभोक्ताओं को सीधे बातचीत की मेज पर लाया गया, जिससे प्रकरणों की पेंडेंसी तेजी से घटी।
संवाद और समन्वय से सुलझे वर्षों पुराने विवाद
कंपनी प्रबंधन ने इस उपलब्धि का श्रेय क्षेत्रीय, वृत्त एवं संभागीय अधिकारियों, प्रवर्तन दलों और विधि शाखा के कर्मचारियों की मेहनत को दिया है। विभागीय टीमों ने उपभोक्ताओं के साथ पहले से बैठकें कर उन्हें लोक अदालत के लाभ समझाए थे। इस समन्वित रणनीति से न केवल लंबे समय से लंबित मुकदमों का भार कम हुआ, बल्कि कंपनी और बिजली उपभोक्ताओं के मध्य विश्वास भी मजबूत हुआ। त्वरित न्याय और आपसी तालमेल की यह व्यवस्था भविष्य में भी बकाया वसूली और विवाद निवारण के लिए एक प्रभावी जरिया बनकर सामने आई है।
