जबलपुर। जिले में वर्ष 2014 से 2022 के मध्य मध्य प्रदेश शासन के विशेष अभियान के तहत स्कूली बच्चों के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के जाति प्रमाणपत्र बनवाए गए थे। वर्तमान में जब युवा केंद्र सरकार की नौकरियों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए लोकसेवा केंद्रों और तहसील कार्यालयों में आवेदन कर रहे हैं, तो राजस्व विभाग के दायरा पंजी में उनका कोई रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है। गोरखपुर और अधारताल तहसील कार्यालयों से रिकॉर्ड मिसिंग का हवाला देकर आवेदनों को सीधे खारिज किया जा रहा है। राजस्व अमले की लापरवाही से छात्र-छात्राओं के सामने संकट खड़ा हो गया है। सरकारी शिविरों से जारी वैध दस्तावेज अब अभिलेखों के अभाव में अवैध साबित हो रहे हैं, जिससे युवाओं का भविष्य दांव पर लग गया है।
राजस्व दायरा पंजी में नाम दर्ज न होना बना वजह
शिविरों के दौरान मैदानी कर्मचारियों ने प्रमाणपत्र छापकर वितरित तो कर दिए, लेकिन नियमानुसार निर्धारित दायरा रजिस्टर में स्थायी क्रमांक, प्रकरण संख्या और मूल जानकारी दर्ज नहीं की। अब संबंधित पटल प्रभारी रजिस्टरों में भौतिक प्रविष्टि न मिलने की बात कहकर छात्रों को लौटा रहे हैं। कर्मचारियों की इस चूक के कारण विधिवत जारी दस्तावेज प्रशासनिक व्यवस्था में शून्य साबित हो रहे हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की अंतिम तिथि हाथ से निकली
केंद्रीय भर्ती परीक्षाओं के लिए निर्धारित अंतिम तारीख से पहले मान्य प्रारूप का प्रमाणपत्र जमा करना जरूरी होता है। राज्य स्तर का दस्तावेज दोबारा बनवाने में 1 से 2 महीने का समय लगता है, जिसके बाद केंद्रीय पत्रक पाने में 1 अतिरिक्त माह लगता है। कुल 2.5 महीने की इस देरी के चलते आवेदक फार्म भरने से वंचित हो रहे हैं। प्रभावित छात्रों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि शिविरों की मूल फाइलें तलाशने के लिए विशेष जांच दल बने और सभी प्रमाणपत्रों को डिजिटल पोर्टल पर दर्ज किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
