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रेल मदद पोर्टल में बड़े बदलाव, अब खत्म होगा यात्रियों को ओटीपी देने का झंझट

नई दिल्ली. रेल मदद पोर्टल की कार्यप्रणाली में व्यापक तकनीकी बदलाव करने का रेलवे बोर्ड ने बड़ा निर्णय लिया है। इसमें आम यात्रियों को ओटीपी देने जैसे अनावश्यक तकनीकी झंझटों से मुक्ति मिलेगी, वहीं लापरवाही बरतने वाले रेल कर्मियों और स्टेशनों की सीधी जवाबदेही भी तय होगी।

अब तक समस्या का समाधान होने के बाद जब तक यात्री अपने मोबाइल पर आए ओटीपी या लिंक के जरिये सत्यापन नहीं करता था, तब तक पोर्टल पर शिकायत बंद नहीं मानी जाती थी। साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों के कारण अधिकांश यात्री अनजान रेल कर्मचारियों के साथ ओटीपी साझा करने से हिचकते थे, जिससे काम पूरा होने के बाद भी शिकायतें हफ्तों तक पेंडिंग दिखाई देती थीं।

इस समस्या को खत्म करने के लिए रेलवे अब तीन वैकल्पिक तकनीकी रास्ते अपना रहा है। पहले विकल्प के रूप में आईवीआरएस आटोमेटेड काल प्रणाली लाई जा रही है, जिसमें यात्री के पास कंप्यूटर जनरेटेड काल आएगी और वह बिना किसी को पासवर्ड बताए सिर्फ फोन पर एक या दो दबाकर समाधान की पुष्टि कर सकेगा।

दूसरा विकल्प ऑटो-क्लोजर का होगा, जिसके तहत मौके पर तैनात स्टाफ द्वारा काम पूरा दर्ज करने के बाद यदि यात्री तय समय सीमा के भीतर दोबारा आपत्ति नहीं करता, तो केस स्वत: बंद हो जाएगा। तीसरे विकल्प के तौर पर टीटीई, ट्रेन कैप्टन या स्टेशन मास्टर भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) करके अपने आधिकारिक एप से शिकायत के निस्तारण को प्रमाणित कर सकेंगे।

इसके साथ ही अब एक ही पीएनआर नंबर या एक ही मोबाइल डिवाइस से कुछ ही मिनटों में बार-बार एक जैसी शिकायतें दर्ज करने पर तकनीकी रोक लगेगी। पहले ऐसी दोहराई गई शिकायतों से कंट्रोल रूम का सर्वर जाम हो जाता था और जरूरतमंद यात्रियों की वास्तविक शिकायतें दब जाती थीं। इसके अलावा, ट्रेनों में पानी खत्म होने की शिकायत अब समस्या हल करने वाले स्टेशन के बजाय उस पिछले स्टेशन के खाते में दर्ज होगी, जिसने तय शेड्यूल के अनुसार पानी नहीं भरा था।

रेलवे बोर्ड के कार्यपालक निदेशक पर्यावरण एवं गृह व्यवस्था प्रबंधन बिनय कुमार झा ने बताया कि अब बोगी में चादर-कंबल बांटने वाले लिनेन अटेंडेंट और कोच मित्र के मोबाइल नंबर भी पोर्टल पर सीधे दिखेंगे, स्टाफ की जियो-टैग्ड हाजिरी अनिवार्य होगी। सुझावों के लिए पोर्टल में अलग कालम बनाया गया है और वंदे भारत में बचे हुए खाने से जुड़ी शिकायतें अब सीधे आईआरसीटीसी को भेजी जाएंगी।

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