जबलपुर। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने अपने कार्यक्षेत्र के 24 जिलों में शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को रोशन करने का अभियान तेज कर दिया है। राज्य शिक्षा केंद्र ने बिना बिजली वाले 2,752 स्कूलों की सूची सौंपी थी, जिसका जमीनी सर्वेक्षण 31 अगस्त 2026 तक पूरा कर लिया गया। पड़ताल के दौरान 394 परिसरों में पहले से आपूर्ति चालू मिली, जबकि कुछ स्थानों पर खुद का भवन न होने अथवा तकनीकी अड़चनों के कारण तत्काल कनेक्शन देना मुमकिन नहीं था। इसके बाद विभाग ने शेष बचे 2,254 विद्यालयों में पावर सप्लाई चालू करने का ठोस खाका खींचा। सघन प्रयासों के चलते अब तक कुल 1,763 शालाओं में कनेक्शन देने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 78 प्रतिशत बैठता है। इस बड़े कदम से ग्रामीण अंचल के बच्चों को पंखे और आधुनिक डिजिटल पढ़ाई की बुनियादी सुविधा मिलेगी।
तय लक्ष्य में से 491 शालाएं बचीं
विद्युत विहीन घोषित परिसरों को विभाग ने उनकी भौगोलिक व तकनीकी स्थिति के आधार पर दो अलग-अलग श्रेणियों में बांटा था। पहली श्रेणी में 814 स्कूल ऐसे चिन्हित हुए, जहां बिजली का बुनियादी ढांचा पहले से मौजूद था और बिना किसी अतिरिक्त निर्माण के सीधे सर्विस लाइन जोड़ दी गई। दूसरी श्रेणी में 1,440 ऐसे संस्थान शामिल रहे, जिनके लिए पोल खड़े करने, तार खींचने और ट्रांसफार्मर लगाने जैसे नेटवर्क विस्तार की जरूरत थी। मैदानी कर्मचारियों ने तेजी दिखाते हुए इस कठिन श्रेणी के 949 संस्थानों में ढांचागत विस्तार पूरा कर चालू लाइन से जोड़ दिया। इस तरह दोनों श्रेणियों को मिलाकर बड़ा आंकड़ा पार हुआ। अब केवल 491 संस्थान शेष हैं, जिन पर विद्युत मंडल का अमला जुटा है।
1,667 आईवीआर नंबर भी जारी हुए
बिजली मीटर और सर्विस केबल लगाने के साथ ही विभागीय रिकॉर्ड को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा रहा है। जिन स्कूलों में करंट दौड़ चुका है, उनमें से 1,667 परिसरों के उपभोक्ता पहचान क्रमांक यानी आईवीआर जनरेट कर पोर्टल पर दर्ज किए जा चुके हैं। इससे भविष्य में रीडिंग लेने, बिल प्रबंधन और लाइन में किसी तरह का व्यवधान आने पर शिकायत दर्ज कराने में शिक्षकों को सीधे सुविधा मिलेगी। विभागीय अधिकारी मुख्यालय स्तर से प्रत्येक जिले की दैनिक मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ताकि कागजी औपचारिकताओं के चलते मीटर लगाने का काम कतई न रुके। बचे हुए परिसरों के नंबर जारी करने का काम भी युद्धस्तर पर चल रहा है।
दूरदराज के छात्रों को सुलभ शैक्षणिक माहौल
संसाधनों के अभाव में पढ़ाई कर रहे सुदूर आदिवासी और ग्रामीण अंचलों के छात्र-छात्राओं के लिए यह बुनियादी बदलाव बेहद राहत लेकर आया है। बिजली पहुंचने से कक्षाओं में रोशनी के साथ हवा का उचित प्रबंध संभव होगा, जिससे भीषण गर्मी के दिनों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ेगी। इसके अलावा कंप्यूटर शिक्षा, स्मार्ट क्लास, इंटरनेट और पेयजल मोटरों के संचालन का रास्ता भी साफ हो गया है। वितरण कंपनी इस बुनियादी कार्य को महज औपचारिक लक्ष्य न मानकर सामाजिक दायित्व के रूप में ले रही है। शेष बची शालाओं में इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने का काम अंतिम चरण में है, जिसे जल्द ही शत-प्रतिशत पूरा कर लिया जाएगा।
