जबलपुर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सेंट्रल जोन बेंच के न्यायिक सदस्य जस्टिस एसके सिंह तथा विशेषज्ञ सदस्य डॉ. प्रशांत गर्गावा की पीठ ने रीवा स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट एवं चूना पत्थर खदानों की शिकायतों का अंतिम निपटारा कर दिया। मामले में अधिवक्ता अमित सिंह सेंगर ने ट्रिब्यूनल के समक्ष संयुक्त समिति की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कंपनी के प्रदूषण नियंत्रण उपायों का विवरण रखा। इस संयुक्त समिति ने सीमेंट कारखाने, खदान क्षेत्र और निकटवर्ती ग्रामीण इलाकों का भौतिक मुआयना किया था। समिति की विस्तृत जांच में हवा तथा पानी को प्रदूषित करने के लगाए गए सभी आरोप निराधार पाए गए। इन तथ्यों के आधार पर ट्रिब्यूनल ने प्लांट को बड़ी राहत देते हुए प्रकरण को समाप्त घोषित किया। प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए ट्रिब्यूनल ने कड़े सुरक्षात्मक मापदंड तय किए हैं। इसके तहत नोरा माइनिंग बाउंड्री के पास सघन सुरक्षा घेरा तैयार किया जाएगा। पुराने खनन वाले रिक्त गड्ढों को बेकार छोड़ने के बजाय उन्हें उपयोगी जल संचयन जलाशयों के रूप में परिवर्तित करना होगा। परिसर में पर्यावरण संतुलन साधने हेतु कुल हरियाली का रकबा बढ़ाकर 33 प्रतिशत तक ले जाना अनिवार्य रहेगा। इसके अलावा औद्योगिक वाहनों के सुचारू आवागमन, सुगम यातायात प्रबंधन तथा पर्यावरणीय अनापत्ति प्रमाणपत्र की हर वैधानिक शर्त का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का दायित्व स्थानीय प्रशासन और प्रबंधन को सौंपा गया है।
