जबलपुर। मोबाइलों की बढ़ती कीमतों से बढ़े जीएसटी के स्लैब को घटाया नहीं गया तो वो दिन दूर नहीं है, जब बाजार क्रेश हो जाएगा। इसका असर देश की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। यह कहना है जबलपुर मोबाइल टेलीकम्युनिकेशन ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक सेठी का। सेठी कहते हैं कि मोबाइल फोन की लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब सीधे ग्राहकों की जेब और खरीदारी पर दिखने लगा है। नई डिवाइस की बढ़ती लागत के चलते आम उपभोक्ता नया मोबाइल खरीदने के बजाय अपने पुराने हैंडसेट की रिपेयरिंग कराकर काम चलाने को मजबूर हैं। बाजार के आंकड़े भी इस गंभीर स्थिति की पुष्टि कर रहे हैं। वर्ष 2026 की अप्रैल-जून तिमाही में देश भर के स्मार्टफोन शिपमेंट में करीब 10 से 11 प्रतिशत की सालाना गिरावट दर्ज की गई है। जबकि दूसरी ओर रिपेयर्ड स्मार्टफोन्स के बाजार में 13 प्रतिशत की अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है। जब स्मार्टफोन के दाम 60ः तक बढ़ चुके हों, तब जीएसटी में 18ः से 5ः की कटौती केवल राहत नहीं, बल्कि बाजार को टूटने से बचाने के लिए बेहद जरूरी कदम है। यदि उपभोक्ता नए फोन खरीदने से हाथ खींचकर केवल रिपेयरिंग पर निर्भर हो रहे हैं तो यह केंद्र सरकार, नीति.निर्माताओं और स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। सरकार को आगामी जीएसटी काउंसिल की बैठक में मोबाइल पर 5ः टैक्स स्लैब का ऐतिहासिक निर्णय लेकर देश के करोड़ों उपभोक्ताओं और लाखों खुदरा व्यापारियों को राहत देनी चाहिए।
इस मुद्दे पर ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन के फाउंडर चेयरमैन कैलाश लख्यानी ने बताया गया कि बाजार में एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स की कीमतें औसतन 60 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। आशंका है कि साल के अंत तक यह बढ़ोतरी 100 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। ऐसे में आगामी 12 सितंबर को प्रस्तावित जीएसटी काउंसिल की बैठक में मोबाइल पर वर्तमान 18ः टैक्स को घटाकर 5ः किए जाने की चर्चा बेहद सामयिक और महत्वपूर्ण है।
