जबलपुर। मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह से उनके निवास पर व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर के मुख्य महाप्रबंधक प्रवीण कुमार ने औपचारिक मुलाकात की। इस बैठक में केंद्र सरकार द्वारा 472 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत से बनने वाले मेगा टैंक ओवरहॉलिंग फैसिलिटी प्रोजेक्ट पर गहन विमर्श हुआ। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इस महत्वाकांक्षी इकाई का भूमिपूजन संपन्न किया जा चुका है। आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड के तहत स्थापित हो रही यह इकाई सैन्य वाहनों के जीर्णोद्धार का प्रमुख केंद्र बनेगी। योजना को तेजी से जमीन पर उतारने के लिए आवश्यक ढांचागत व्यवस्थाओं के विस्तार, अंतर-सरकारी सहयोग और स्थानीय स्तर पर औद्योगिक विकास को गति देने पर दोनों प्रतिनिधियों के बीच विस्तार से सहमति बनी।
आधुनिक सैन्य क्षमता से लैस होगा नया रक्षा तंत्र
इस अत्याधुनिक संयंत्र की स्थापना के उपरांत भारतीय थलसेना के टी-72 और टी-90 युद्धक टैंकों की तकनीकी मरम्मत तथा उन्नयन का कार्य जबलपुर में संपन्न होगा। कार्ययोजना के अनुसार प्रतिवर्ष कुल 80 टी-सीरीज टैंकों के कायाकल्प की समग्र क्षमता इस परिसर में विकसित की जाएगी। अब तक सामरिक आवश्यकताओं के तहत यह विशाल कार्यभार मुख्य रूप से चेन्नई के अवॉडी स्थित हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री द्वारा संभाला जाता था। मध्य भारत में दूसरा विशाल विकल्प तैयार होने से सीमावर्ती मोर्चों पर तैनात बख्तरबंद वाहनों की सर्विसिंग में लगने वाला समय काफी घट जाएगा। आपातकालीन परिस्थितियों में सैन्य दलों को तुरंत तकनीकी संबल प्राप्त होगा, जिससे रणनीतिक मोर्चे पर सेना का दखल और तैयारी पहले से अधिक मजबूत होगी।
आधारभूत विकास हेतु राज्य सरकार देगी पूर्ण सहयोग
परियोजना को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने के लिए आवश्यक बिजली, पानी, पहुंच मार्ग और अन्य नागरिक सुविधाओं पर मंथन हुआ। मुख्य महाप्रबंधक ने कार्य की प्रगति के लिए दोनों सरकारों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता जताई। लोक निर्माण मंत्री ने आश्वस्त किया कि निर्माण के दौरान आने वाली प्रशासनिक अथवा तकनीकी बाधाओं को नियमों के दायरे में तुरंत सुलझाया जाएगा। संयंत्र के निर्माण और संचालन में राज्य शासन अपनी तरफ से पूर्ण सहयोग सुनिश्चित करेगा। दोनों पक्षों ने माना कि इस तरह के रक्षा उपक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ राज्य की तकनीकी साख को भी राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाते हैं।
क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और स्थानीय हुनर को मिलेगा संबल
संयंत्र की शुरुआत से महाकौशल अंचल के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को कलपुर्जों की आपूर्ति के व्यापक व्यापारिक अवसर उपलब्ध होंगे। भारी इंजीनियरिंग कार्य शुरू होने से क्षेत्र के तकनीकी युवाओं, डिप्लोमा धारकों और कुशल श्रमिकों के लिए सीधी आजीविका के नए मार्ग खुलेंगे। निजी सहायक उद्योगों का जाल विकसित होने से शहर का आर्थिक ढांचा सशक्त होगा। बड़े पैमाने पर होने वाले पूंजीगत निवेश से सहायक परिवहन, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र को भी अप्रत्याशित मजबूती हासिल होगी। कुल मिलाकर यह रक्षा प्रतिष्ठान अंचल के समग्र औद्योगिक परिदृश्य को नई दिशा प्रदान करेगा।
