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ट्विशा शर्मा प्रकरण में सास गिरीबाला सिंह को आंशिक राहत, पलट गया मामला, देखें वीडियो




जबलपुर
। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मृत्यु मामले की मुख्य आरोपी सास गिरीबाला सिंह की जमानत अर्जी पर अहम सुनवाई पूरी हुई। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई की जांच रिपोर्ट में मृतका के परिजनों द्वारा लगाए गए दहेज उत्पीड़न के संगीन आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी है। जांच एजेंसी को इस संबंध में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले, जिसके आधार पर अदालत ने आवेदिका को आंशिक राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति ने वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह को निर्देशित किया कि वे अपने मूल जमानत आवेदन पत्र से दहेज प्रताड़ना संबंधी सभी संदर्भों को तत्काल संशोधित कर हटाएं। अब इस पूरे कानूनी विवाद की आगामी सुनवाई 8 तारीख को निर्धारित की गई है।

​सीबीआई जांच में दहेज उत्पीड़न के सबूत नहीं मिले

​केंद्रीय जांच एजेंसी ने अपनी विस्तृत चार्जशीट में स्पष्ट किया कि पारिवारिक कलह और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की पड़ताल के दौरान वैवाहिक दहेज की मांग अथवा शारीरिक-मानसिक उत्पीड़न का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आया। जांच दल ने गवाहों के बयानों, बैंक खातों के लेन-देन और परिजनों के दावों का बारीक विश्लेषण किया, किंतु मृतका को अतिरिक्त संपत्ति या नकदी के लिए तंग किए जाने का कोई आधार नहीं बना। एजेंसी का यही निष्कर्ष न्यायिक समीक्षा के दौरान बचाव पक्ष का सबसे मजबूत आधार बन गया।

​अदालत ने बचाव पक्ष को दिए आवश्यक निर्देश

​अदालत कक्ष में चली लंबी बहस के दौरान बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह ने केंद्रीय एजेंसी की निष्कर्ष आख्या का उल्लेख करते हुए तर्क रखे। उन्होंने पीठ को अवगत कराया कि जब केंद्रीय एजेंसी स्वयं दहेज मांगने के साक्ष्य जुटाने में विफल रही है, तब इस आधार पर कारावास में बनाए रखना न्यायोचित नहीं है। उच्च न्यायालय ने इन वैधानिक दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिया कि याचिका में किए गए दावों को सीबीआई की वर्तमान चार्जशीट के अनुकूल व्यवस्थित किया जाए। अभियोजन पक्ष को नए सिरे से संशोधित दस्तावेजों का अध्ययन करने का अवसर देते हुए पीठ ने प्रकरण को आगामी कार्यवाही हेतु सूचीबद्ध कर दिया।

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