जबलपुर। मानसून ब्रेक के कारण भीषण उमस और चिपचिपी गर्मी से जूझ रहे जबलपुर सहित पूरे मध्य प्रदेश के बाशिंदों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 72 घंटों में झमाझम बारिश का नया दौर शुरू होने के प्रबल आसार बन रहे हैं। बंगाल की खाड़ी में अंडमान निकोबार द्वीप समूह तथा उसके नजदीकी तटीय क्षेत्रों में एक नया कम दबाव का मजबूत क्षेत्र सक्रिय हुआ है। यह मौसमी सिस्टम आगे चलकर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकता है, जिसके ओडिशा और आंध्र प्रदेश के समुद्री तटों से टकराने की पूरी संभावना है। इसके तटीय इलाकों से टकराते ही हवाओं की दिशा बदलेगी और मध्य भारत के मौसम मिजाज में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।
कम दबाव का क्षेत्र समुद्र तल से काफी ऊंचा
मौसम वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र समुद्र तल से 5 किलोमीटर से अधिक ऊंचाई पर अपनी स्थिति बनाए हुए है। स्थानीय बादलों की उपस्थिति से कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी और छिटपुट वर्षा के आसार बने हुए हैं। दिन के समय तेज चटक धूप खिलने से वातावरण में उमस बढ़ गई है, जिससे दिन का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया जा रहा है। यह पारा सामान्य स्तर से 2 से 3 डिग्री सेल्सियस अधिक चल रहा है। आमतौर पर मानसून अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रदेश से विदा ले लेता है। इस अंतिम पड़ाव में कुल वर्षा का पैमाना करीब 30 इंच तक ही सिमट पाया है। हालांकि यह स्थिति पिछले वर्ष की तुलना में काफी पिछड़ी हुई मानी जा रही है, फिर भी मौसमी औसत की तुलना में यह आंकड़ा सीजन की 90 फीसदी बारिश दर्शा रहा है। पूरे राज्य के समग्र वर्षा अनुपात को देखा जाए तो यह आंकड़ा 32 इंच का स्तर पार कर चुका है।
मौसम के बदलाव से फसलों पर असर
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार आगामी 2 हफ्तों के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश में कम बारिश रहने और तापमान में वृद्धि की संभावना जताई गई है। इस अवधि में किसान रबी सीजन की मटर फसल की बोवनी शुरू करते हैं, इसलिए उन्हें उन्नत और गुणवत्तापूर्ण प्रमाणित बीजों का चयन करने की सलाह दी गई है। वर्षा की कमी और बढ़े हुए तापमान की स्थिति में खेतों में लगी सब्जियों व अन्य खरीफ फसलों में सफेद मक्खी तथा रसचूसक कीटों का प्रकोप तेजी से पनपता है। किसानों को समय रहते इन कीटों की प्रभावी रोकथाम के कदम उठाने चाहिए। अधिक पानी की मांग वाली धान की फसल को इल्ली और विभिन्न कीट व्याधियों से सुरक्षित रखने हेतु खेतों की सतत निगरानी तथा समुचित सिंचाई का प्रबंध अनिवार्य है। इसके साथ ही सोयाबीन की फलियों व पौधों के अन्य संवेदनशील भागों को नुकसान पहुंचाने वाली इल्लियों से बचाव के लिए उचित कीटनाशकों का छिड़काव बेहद जरूरी है।
