जबलपुर। मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड भोपाल की तरफ से जबलपुर स्थित ई-दक्ष केंद्र में कलेक्टर के मार्गदर्शन तथा तन्वी सोशल सर्विसेज समिति अध्यक्ष व मास्टर ट्रेनर यशदीप चतुर्वेदी के सहयोग से अहम कार्यशाला रखी गई। इस प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, जिला अभियोजन संचालनालय, राज्य साइबर पुलिस जोन जबलपुर, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के विधि विभाग और सरकारी बैंकों के 32 अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे। विशेषज्ञों ने साफ किया कि देश की न्याय व्यवस्था में डिजिटल अरेस्ट का कोई भी प्रावधान दर्ज नहीं है। कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य संरक्षण, अधिनिर्णयन प्रणाली, विधिक सुरक्षा उपायों, असामान्य शेयर बाजार मुनाफा, फर्जी निवेश, अनधिकृत क्रिप्टो एक्सेस, ओटीपी तथा यूपीआई के माध्यम से अंजाम दी जाने वाली वित्तीय जालसाजी से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं पर गंभीर चर्चा हुई।
अनजान वीडियो कॉल और संदिग्ध फाइल से तुरंत बचें
अपराधी फोन पर पुलिस की वर्दी धारण करके आम लोगों पर मानसिक दबाव बनाते हैं, इसलिए ऐसी किसी भी धमकी से डरने की कतई जरूरत नहीं है। व्हाट्सएप पर आने वाली ट्रेडिंग से जुड़ी एपीके फाइल को फोन में जगह न दें। रजिस्टर्ड सिम कार्ड बंद होते ही नया निकलवाएं, क्योंकि बेसिक कीपैड फोन में भी सिम लगाकर यूपीआई पिन दोबारा रीसेट किया जा सकता है। नया सिम मिलने तक संबंधित बैंक खाता पूरी तरह बंद रखें। खराबी आने पर मोबाइल सुधारने देने से पूर्व सिम कार्ड बाहर निकालें और फोन में मौजूद मेंटेनेंस मोड सक्रिय कर दें। ऑनलाइन नुकसान की स्थिति में ट्रांजेक्शन आईडी, यूटीआर नंबर, एसएमएस तथा स्क्रीनशॉट संभाल कर रखें। घटना के 3 दिन के भीतर 1930 नंबर अथवा आधिकारिक वेब पोर्टल पर शिकायत भेजकर बैंक शाखा को भी इसकी सूचना दें।
आईटी एक्ट के तहत पांच करोड़ तक क्षतिपूर्ति
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 46 के तहत संचालित विशेष अदालत में प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग न्याय निर्णयन अधिकारी के रूप में मामलों की सुनवाई करते हैं। इस अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया के जरिए 5 करोड़ तक के दावों का निपटारा 4 से 6 माह की मियाद में हो जाता है। धारा 43 से 45 के अंतर्गत दुर्भावना साबित न होने पर भी पीड़ित पक्ष को जुर्माना और हर्जाना दिए जाने की व्यवस्था है। कोई भी आम नागरिक या सरकारी महकमा सीधे अपना वाद प्रस्तुत कर सकता है, साथ ही पीठ स्वतः संज्ञान लेने में भी सक्षम है। 3 अगस्त 2012 के सरकारी आदेश अनुसार ईमेल, डिजिटल हस्ताक्षर, पेनड्राइव तथा कंप्यूटर नेटवर्क को सुरक्षित तंत्र का दर्जा हासिल है। इनका अनाधिकृत प्रयोग करने पर 10 साल की जेल तय है। धारा 72 के मुताबिक निजी ब्योरा सार्वजनिक करना अपराध है। अदालतों में साक्ष्य हेतु भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की धारा 63(4) का सर्टिफिकेट और हैश वैल्यू जरूरी है। जांच में सहयोग न करने वाली कंपनियों पर धारा 67C के नोटिस बाद 72 घंटे में रिकॉर्ड न देने पर 25 लाख रुपए जुर्माना लगाया जा सकता है।

