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सात दिन बाद फिर चल पड़ी कैथ लैब,दिल के मरीजों को बड़ी राहत



जबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में विगत 7 दिनों से बंद पड़ी कैथ लैब को तकनीकी सुधार के बाद दोबारा चालू कर दिया गया है। मुख्य मशीन में अचानक आई आंतरिक खराबी के कारण हृदय रोगियों का जरूरी परीक्षण पूरी तरह रुक गया था, जिससे महाकौशल संभाग के 16 जिलों से उपचार की आस लेकर पहुंचे सैकड़ों निर्धन परिवारों को भारी मानसिक व शारीरिक कठिनाई झेलनी पड़ी। शासकीय संस्थान पर आश्रित रहने वाले ऐसे लोग जिनके पास आयुष्मान भारत योजना का कार्ड भी नहीं था, वे गहरे संकट में फंस गए थे। अस्पताल के विशेषज्ञ इंजीनियरों द्वारा उपकरण को दुरुस्त किए जाने के बाद अब हृदय संबंधी परीक्षणों का कार्य सुचारू रूप से संचालित होने लगा है।

​कमजोर माली हालत वाले परिवारों को मिला सहारा

​कार्डियोलॉजी विभाग में प्रतिदिन दर्जनों जरूरतमंद छाती में दर्द, सांस फूलने और धमनी अवरोध के प्राथमिक लक्षणों के साथ परामर्श लेने आते हैं। रक्त नलिकाओं की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन करने के लिए यह परीक्षण अनिवार्य प्रक्रिया माना जाता है। सरकारी व्यवस्था में यह जांच नाममात्र के शुल्क पर उपलब्ध रहती है, जबकि बाजार के निजी केंद्रों में इसके लिए बहुत मोटी धनराशि चुकानी पड़ती है। साधनहीन तबके के पास इतने संसाधन नहीं होते कि वे गैर-सरकारी क्लीनिकों के महंगे पैकेज का भार सहजता से वहन कर सकें। साधनहीन लोगों को मजबूरी में अपनी जमा पूंजी खर्च करनी पड़ रही थी अथवा कर्ज की व्यवस्था में जुटना पड़ रहा था। तकनीकी खराबी का निराकरण होने से अब कतार में लगे पुराने आवेदकों की जांच प्रक्रिया तय रोस्टर के आधार पर शुरू हो चुकी है।

​संभाग स्तरीय आपातकालीन व्यवस्था के लिए बैकअप जरूरी

​इस बड़े चिकित्सा केंद्र पर केवल स्थानीय शहर का ही नहीं, बल्कि कटनी, डिंडोरी, मंडला, नरसिंहपुर और सिवनी जैसे दूरदराज के अंचलों का भी बहुत बड़ा दारोमदार रहता है। किसी भी आपातकालीन यूनिट में उपकरण का लंबे समय तक निष्प्रभावी रहना प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता विकल्प की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है। संभाग के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से गंभीर अवस्था में एंबुलेंस के जरिए आने वाले लोगों को यदि जांच सुविधा उपलब्ध न हो तो खतरे की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जीवन रक्षक संयंत्रों के नियमित रखरखाव के लिए तकनीकी दल चौबीस घंटे उपलब्ध रहना चाहिए। भविष्य में इस प्रकार का व्यवधान न आए, इसके लिए संधारण अनुबंध को और अधिक सशक्त बनाकर समयबद्ध निगरानी सुनिश्चित करना समय की मांग है।

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