नई दिल्ली. रेलवे ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के कर्मचारियों के हित में एक बड़ा और व्यावहारिक कदम उठाया है। रेलवे बोर्ड ने गैर-सुरक्षा (नॉन-सेफ्टी) श्रेणी के पदों पर प्रमोशन के लिए योग्यता मानकों (क्वालिफाइंग मार्क्स) में छूट और बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड योजना को लेकर जारी भ्रम को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
बोर्ड की ओर से सभी जोनल महाप्रबंधकों और उत्पादन इकाइयों को जारी नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अब आरक्षित वर्ग की सीटें खाली रहने पर फेल होने वाले कर्मचारियों में से सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वालों को प्रमोशन का अवसर दिया जाएगा। इस फैसले से देशभर के जोनल कार्यालयों में वर्षों से खाली पड़े आरक्षित पदों को समयबद्ध तरीके से भरने का रास्ता साफ हो गया है।
इसलिए लिया यह निर्णय
रेलवे बोर्ड के संज्ञान में यह बात आई थी कि विभिन्न रेलवे मंडलों में एससी-एसटी वर्ग के प्रमोशन नियमों को लेकर लंबे समय से संशय की स्थिति बनी हुई थी। कई बार योग्य उम्मीदवार न मिलने के कारण आरक्षित सीटें खाली रह जाती थीं। इसे देखते हुए रेलवे बोर्ड ने पूर्व के तमाम परिपत्रों का अध्ययन करने के बाद एक विस्तृत और स्पष्ट रूपरेखा तय की है, ताकि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और एकरूपता बनी रहे।
अंकों में 10 प्रतिशत की छूट
जारी परिपत्र के अनुसार, ग्रुप सी पदों के भीतर वरिष्ठता के आधार पर होने वाले चयन में एससी और एसटी वर्ग के कर्मियों को प्रोफेशनल एबिलिटी और कुल एग्रीगेट अंकों में 10 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, ग्रुप सी से ग्रुप बी के 70 प्रतिशत चयन कोटे में जहां सामान्य वर्ग के कर्मचारियों के लिए लिखित परीक्षा और कुल अंकों में 60 प्रतिशत कटऑफ अनिवार्य होती है, वहीं एससी-एसटी कर्मियों के लिए इसे घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही सर्विस रिकॉर्ड में कम से कम 15 अंक हासिल करना अनिवार्य रहेगा।
अब नहीं छूटेंगी खाली सीटें
आदेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उन आरक्षित सीटों को भरना है जो नियमानुसार छूट देने के बाद भी खाली रह जाती हैं। रेलवे बोर्ड ने तय किया है कि यदि 10 प्रतिशत की सामान्य छूट के बाद भी तय कोटे के मुताबिक एससी-एसटी कर्मचारी पास नहीं हो पाते हैं, तो बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड व्यवस्था लागू की जाएगी। इस व्यवस्था के तहत फेल घोषित हुए एससी-एसटी कर्मचारियों में से सबसे अधिक अंक पाने वालों की सूची तैयार की जाएगी। इसके लिए मानक तय किया गया है कि अभ्यर्थी ने लिखित परीक्षा, साक्षात्कार और सर्विस रिकॉर्ड, तीनों में अलग-अलग और कुल मिलाकर न्यूनतम 20 प्रतिशत अंक अवश्य हासिल किए हों।
6 महीने के ट्रायल पर मिलेगा नियमित प्रमोशन, सेफ्टी केटेगरी में छूट नहीं
बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड योजना के अंतर्गत प्रमोट होने वाले कर्मचारियों को तुरंत स्थायी पदभार नहीं मिलेगा। रेलवे ने इसमें एक सख्त निगरानी व्यवस्था जोड़ी है, जिसके तहत कर्मचारियों को पहले 6 महीने के लिए तदर्थ (एड-हॉक) आधार पर प्रमोट किया जाएगा। इस छह महीने की अवधि के दौरान संबंधित कर्मचारी के कामकाज, कार्यकुशलता और आचरण का बारीकी से मूल्यांकन होगा। छह महीने बाद सक्षम प्राधिकारी उनके प्रदर्शन की व्यापक समीक्षा करेंगे और रिपोर्ट संतोषजनक पाए जाने पर ही उनके प्रमोशन को नियमित यानी परमानेंट किया जाएगा।
सेफ्टी कैटेगरी में नहीं होगा बदलाव
रेलवे बोर्ड ने यह भी बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि ट्रेनों के संचालन और यात्रियों की सुरक्षा (सेफ्टी कैटेगरी) से जुड़े किसी भी पद पर अंकों या मानकों में कोई छूट नहीं मिलेगी। संरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ग्रुप सी के तहत सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (एलडीसीई) जहां पैनल मेरिट के आधार पर बनता है, वहां बेस्ट अमंगस्ट द फेल्ड योजना लागू नहीं होगी। रेलवे ने यह भी साफ किया है कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का कर्मी बिना किसी छूट का लाभ लिए सामान्य योग्यता मानकों के आधार पर परीक्षा पास करता है, तो उसका समायोजन अनारक्षित सीट पर होगा, ताकि अन्य आरक्षित साथियों के लिए कोटे की सीट बची रहे। पूर्व में संपन्न हो चुकी चयन प्रक्रियाओं को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
