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जबलपुर। जिले में बारिश के दौरान सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 में 150 और अगस्त में 176 मामले दर्ज हुए। वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. आलोक श्रीवास्तव के अनुसार विष का प्रभाव नसों और रक्त नलिकाओं पर पड़ने से किडनी की कार्यप्रणाली रुक जाती है और मरीजों को डायलिसिस कराना पड़ता है। अप्रैल 2024 से जून 2026 के मध्य कुल 34 मरीजों को डायलिसिस के लिए भेजा गया। वहीं सर्प विशेषज्ञ मनीष कुलश्रेष्ठ ने बताया कि जिले में पाई जाने वाली 22 प्रजातियों में कोबरा, करैत और वाइपर तीन प्रजातियां अत्यंत जहरीली हैं। वर्ष 2026 में अप्रैल माह में 30, मई में 32 और जून में 87 लोग सांप के काटने से पीड़ित हुए, जिनमें 4 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।
डायलिसिस यूनिट तक पहुंचे जहरीले डंक के मरीज
उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 14 रोगियों को कृत्रिम रक्त शोधन की नौबत आई। इसके बाद अप्रैल 2025 से जून 2026 तक 20 अन्य पीड़ितों को डायलिसिस के लिए रेफर करना पड़ा। जुलाई और अगस्त माह में मेडिकल कॉलेज भेजे गए मरीजों की पूर्ण समीक्षा रिपोर्ट आना अभी बाकी है। रक्त संचार बाधित होने से शरीर में दूषित तरल और अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिससे जीवन रक्षा हेतु डायलिसिस अनिवार्य बन जाता है। केवल 1 महीने के अंतराल में 26 नए मामलों की वृद्धि ने चिकित्सा तंत्र को सचेत कर दिया है।
झाड़-फूंक छोड़कर सीधे पहुंचे अस्पताल
विशेषज्ञों के मुताबिक अधिकांश सर्प प्रजातियां विषहीन होती हैं, लेकिन कोबरा, काला सांप यानी करैत और वाइपर का काटना सीधे महत्वपूर्ण आंतरिक अंगों को बेकार कर देता है। बारिश में बिलों से बाहर आने के कारण खेतों और बस्तियों में इनका खतरा सर्वाधिक रहता है। प्राथमिक समय में अंधविश्वास अथवा घरेलू नुस्खों में वक्त गंवाने के स्थान पर तुरंत एंटी स्नेक वेनम युक्त अस्पताल पहुंचना जरूरी है, ताकि विष शरीर में फैलने से पूर्व अंगों की सुरक्षा की जा सके।
