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रेलवे बोर्ड के फरमान पर भड़का आक्रोश, डब्ल्यूसीआरएमएस ने टेल लैंप ढोने के विरोध में किया आंदोलन का ऐलान



बिना गार्ड वाली मालगाड़ियों में अतिरिक्त काम थोपने पर टकराव तेज,डब्ल्यूसीआरएमएस ने जारी किया नोटिस

जबलपुर।  रेलवे बोर्ड द्वारा बिना ट्रेन मैनेजर और ब्रेक वैन के चलने वाली मालगाड़ियों में टेल लैंप के रखरखाव व प्रबंधन की जिम्मेदारी लोको पायलट और सहायक लोको पायलट पर डालने के खिलाफ कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। बोर्ड के इस फरमान का कड़ा विरोध करते हुए वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के महासचिव अशोक शर्मा ने चरणबद्ध आंदोलन का नोटिस जारी किया है। संघ ने चेताया है कि यह व्यवस्था नियमों का खुला उल्लंघन और रेल सुरक्षा से खिलवाड़ है। इसके तहत 28 सितंबर से पश्चिम मध्य रेलवे के सभी रनिंग स्टाफ काली पट्टी बांधकर काम करेंगे तथा जबलपुर, भोपाल व कोटा मंडलों के प्रमुख स्टेशनों व लॉबियों पर विशाल धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

​सुरक्षा नियमों के विपरीत थोपी गई नई व्यवस्था

​श्री शर्मा के अनुसार, रेल परिचालन के दौरान टेल लैंप और टेल बोर्ड की मजबूती सुनिश्चित करने का कार्य जनरल रूल्स तथा सब्सिडियरी रूल्स के तहत पहले से तय व्यवस्था में आता है। रनिंग क्रू पर यह अतिरिक्त कार्यभार थोपना सुरक्षा मानकों के बिल्कुल उलट है। ट्रैक और यार्ड में संरक्षा सुनिश्चित करने वाले इन नियमों की अनदेखी से ट्रेनों के सुरक्षित संचालन पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इस कारण रेल कर्मचारियों में भारी नाराजगी व्याप्त है।

​इंजन के भीतर उपकरण रखना बेहद जोखिम भरा

​संघ ने स्पष्ट किया कि टेल लैंप एक भारी और तकनीकी उपकरण है जिसे व्यक्तिगत सामान की तरह संभालना संभव नहीं होता। लोकोमोटिव के केबिन में इसे सुरक्षित रखने के लिए कोई बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं है। क्रू सदस्यों को लॉबी से चार्ज लेने और सौंपने के लिए कई विषम व पथरीले रास्तों से गुजरकर यार्ड तक पैदल चलना पड़ता है। भारी सामान उठाने से कर्मचारियों को मानसिक तनाव के साथ शारीरिक दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी।

मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन तय

​पश्चिम मध्य रेलवे के तीनों मंडलों में कर्मचारी अब चुप बैठने के मूड में नहीं हैं। पहले चरण में 28 तारीख से शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया जाएगा। यदि बोर्ड ने इस अव्यावहारिक आदेश को वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस गतिरोध के कारण ट्रेनों की आवाजाही या कानून व्यवस्था पर असर पड़ता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी रेल प्रशासन की होगी। औद्योगिक शांति हेतु तुरंत रोक की मांग की गई है। 


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