हाई कोर्ट ने कंपनी को कलेक्टर के समक्ष पक्ष रखने और 4 माह में निराकरण के दिए निर्देश
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सिहोरा स्थित लौह अयस्क खदानों में स्वीकृत सीमा से कहीं अधिक अवैध खनन किए जाने के मामले में जारी 234 करोड़ रुपये के वसूली नोटिस को चुनौती देने वाली खनन कंपनी की याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए साफ किया कि चूंकि यह प्रकरण वर्तमान में सक्षम प्राधिकारी यानी कलेक्टर के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए याचिकाकर्ता कंपनी को वहीं उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना चाहिए। अदालत ने जिला कलेक्टर को निर्देश दिया है कि वे आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से 4 माह के भीतर पूरे प्रकरण की विधिवत सुनवाई कर अंतिम निराकरण सुनिश्चित करें।
मामले के अनुसार मेसर्स आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन को जबलपुर जिले के सिहोरा क्षेत्र अंतर्गत 20.002 हेक्टेयर की टिकरिया खदान और 11.578 एकड़ की प्रतापपुर लौह अयस्क खदान का पट्टा आवंटित किया गया था। इन दोनों खदानों में वर्ष 2004 से वर्ष 2017 के बीच पर्यावरण और खनन अनुमतियों का उल्लंघन करते हुए अत्यधिक मात्रा में अयस्क निकालने की गंभीर शिकायतें मिली थीं। इसकी विस्तृत तकनीकी जांच के लिए 23 अप्रैल 2025 को एक विशेष जांच समिति गठित की गई थी। समिति द्वारा सौंपी गई भौतिक सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने 10 नवंबर 2025 को टिकरिया खदान पर 113 करोड़ 83 लाख रुपये और प्रतापपुर खदान पर 120 करोड़ 69 लाख रुपये की भारी भरकम वसूली प्रस्तावित की थी।
खनन कम्पनी ने दिए ये तर्क
खनन कंपनी की ओर से उच्च न्यायालय में तर्क दिया गया कि जिस जांच समिति के प्रतिवेदन पर यह कार्रवाई की जा रही है, उसका गठन किसी वैध कानूनी प्रावधान के तहत नहीं हुआ था। ऐसे में उस रिपोर्ट के आधार पर खनिज का मूल्यांकन, रॉयल्टी या जुर्माना वसूलना पूरी तरह अनुचित है। इसके विपरीत राज्य शासन की ओर से पैरवी कर रहे अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और शासकीय अधिवक्ता पीयूष जैन ने अदालत को बताया कि जिला प्रशासन ने कंपनी को अपना पक्ष रखने के लिए कई बार पर्याप्त अवसर दिए हैं और मामला अभी अंतिम निर्णय के स्तर पर लंबित है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद युगलपीठ ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी और स्पष्ट किया कि कलेक्टर हाई कोर्ट की किसी भी टिप्पणी से प्रभावित हुए बिना स्वतंत्र निर्णय लेंगे तथा अंतिम फैसले से असंतुष्ट होने पर कंपनी को वैधानिक अपील का अधिकार रहेगा।
