जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर में शैक्षणिक सत्र 2025-26 लगभग 6 माह पिछड़ गया है, जबकि प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों में परीक्षाएं संपन्न होकर परिणाम भी घोषित हो चुके हैं। इस भारी लेटलतीफी पर उच्च शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए वार्षिक कैलेंडर की समीक्षा कर स्पष्टीकरण मांगा था। इसके जवाब में परीक्षा नियंत्रक ने अपनी विफलता छुपाने के लिए सारा दोष जनगणना ड्यूटी पर मढ़ते हुए भ्रामक रिपोर्ट भेजी है। रिपोर्ट में तर्क दिया गया कि गोपनीय शाखा के कर्मचारियों की लंबी जनगणना तैनाती और उसके बाद उनके सामूहिक अवकाश पर जाने से परिणाम समय पर तैयार नहीं हो सके। कुलगुरु द्वारा परीक्षा संबंधी कार्यों की पूरी स्वतंत्रता दिए जाने और कुलसचिव के दखल से मुक्त रखे जाने के बावजूद रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली से व्यवस्थाएं पटरी से उतर चुकी हैं।
विभाग को भेजी रिपोर्ट में गढ़े अजीब बहाने
परीक्षा नियंत्रक ने उच्च शिक्षा विभाग को भेजी अपनी सफाई में दो प्रमुख दलीलें पेश की हैं। पहली दलील यह दी गई कि गोपनीय शाखा के कर्मचारियों की जनगणना में ड्यूटी लगने के कारण परीक्षा परिणाम समय पर तैयार करने का काम अटक गया। दूसरी दलील यह दी कि जनगणना से लौटने के बाद कर्मचारियों ने एक साथ सामूहिक अवकाश ले लिया, जिससे मूल्यांकन और रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह थम गई। हकीकत यह है कि पूरे मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों से कर्मचारी जनगणना में शामिल हुए थे, लेकिन सत्र केवल रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का ही पिछड़ा। इससे साफ जाहिर होता है कि विश्वविद्यालय में कुशल प्रबंधन और प्रशासनिक योजना का घोर अभाव रहा है।
सफलता का खुद श्रेय लेकर थोपी नाकामी
परीक्षा नियंत्रक ने उच्च शिक्षा विभाग को बताया कि स्नातक तृतीय वर्ष की परीक्षाएं पूर्व निर्धारित समय 29 अप्रैल 2026 से 16 मई 2026 के बीच सफलतापूर्वक आयोजित करा ली गई थीं। उन्होंने समय पर परीक्षा कराने का श्रेय तो खुद ले लिया, लेकिन जब बात समय पर परिणाम घोषित करने की आई तो सारा दोष कर्मचारियों की कमी पर डाल दिया। कुलगुरु ने नियमों को ताक पर रखकर परीक्षा विभाग के सारे अधिकार परीक्षा नियंत्रक को सौंप रखे हैं, जिसमें कुलसचिव भी हस्तक्षेप नहीं कर सकते। इसके बावजूद व्यवस्था संभलने के बजाय बिगड़ती गई और विश्वविद्यालय प्रशासनिक अकर्मण्यता की प्रयोगशाला बन गया।
चंद छात्रों की खातिर हजारों भविष्य दांव पर
परीक्षा नियंत्रक ने पिछले सत्र 2024-25 का हवाला देते हुए बताया कि स्नातक प्रथम वर्ष की पूरक परीक्षा की समय-सारणी में बदलाव के कारण कई छात्र परीक्षा से वंचित रह गए थे। विभाग के मुताबिक छात्रों के हित को देखते हुए दोबारा विशेष पूरक परीक्षा आयोजित कर परिणाम घोषित किए गए। इस अतिरिक्त कार्यभार के कारण चालू सत्र 2025-26 के स्नातक द्वितीय वर्ष की परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित हुई। इस पूरी प्रक्रिया की जमीनी सच्चाई यह है कि महज 140 छूटे हुए विद्यार्थियों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने के चक्कर में 20 हजार से अधिक नियमित विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटका दिया गया।
