जबलपुर। जिले में मानसूनी बारिश के उपरांत धान की फसल में यूरिया एवं डीएपी के छिड़काव का दौर आरंभ होते ही उर्वरक की कृत्रिम किल्लत खड़ी हो गई है। सहकारी साख समितियों और केंद्रीय विपणन केंद्रों पर वितरण की जटिल व्यवस्था का अनुचित फायदा उठाकर निजी विक्रेताओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में लूट मचा रखी है। सहकारी संस्थाओं में ऋण पुस्तिका धारक किसानों को जमीन के अनुपात में सीमित खाद परमिट पर मिल रही है। बटाई अथवा सिकमी पर खेती करने वाले भूमिहीन काश्तकारों को 267 रुपये सरकारी मूल्य वाली बोरी के लिए निजी दुकानों पर 330 से 340 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। तहसील स्तरीय सेंट्रल लॉक केंद्रों से 15 से 20 किलोमीटर दूर रहने वाले उत्पादक नकद खाद न मिलने से बेहाल हैं।
निजी विक्रेताओं की मनमानी से किसानों की बढ़ी मुसीबत
ग्रामीण अंचलों में सक्रिय खाद विक्रेता प्रति बोरी सीधे 15 रुपये से अधिक का मुनाफा वसूल रहे हैं। काश्तकारों पर दबाव बनाने के लिए यह अफवाह फैलाई जाती है कि जिले में स्टॉक समाप्त हो चुका है और 2 दिन बाद आपूर्ति पूरी तरह ठप हो जाएगी। डर के मारे अन्नदाता महंगे भाव पर खाद का प्रबंध कर रहे हैं। सहकारी विपणन मर्यादा संस्थाओं से किसानों को आवश्यकता अनुसार मात्रा उपलब्ध नहीं हो रही है, जिससे सैकड़ों मीट्रिक टन की दैनिक खपत वाले क्षेत्रों में हाहाकार मचा हुआ है।
अवैध गोदामों और फर्जी दुकानों पर प्रशासन बिल्कुल खामोश
व्यापारियों ने तहसील स्तर पर जारी 1 लाइसेंस के सहारे 2 अलग-अलग स्थानों पर अवैध दुकानें संचालित कर रखी हैं। ग्रामीण इलाकों में बिना किसी वैध पंजीयन के निजी संस्थान धड़ल्ले से चल रहे हैं। प्रतिदिन ट्रकों से खाद की बड़ी खेप व्यापारियों के गुप्त गोदामों में उतारी जा रही है, परंतु कृषि विभाग के पास इन भंडारों का कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है। स्थानीय प्रशासनिक महकमा निरीक्षण और दंडात्मक कार्रवाई के अपने विधिक अधिकार क्षेत्र से पल्ला झाड़कर केवल तमाशा देख रहा है।
समितियों से नकद बिक्री शुरू कर राहत दिलाए शासन
तहसील स्तर के सेंट्रल लॉक से नकद बिक्री का दायरा सीमित होने के कारण छोटे काश्तकारों का आवागमन खर्च और समय दोनों व्यर्थ हो रहे हैं। क्षेत्रीय उत्पादक मांग कर रहे हैं कि प्रत्येक प्राथमिक सहकारी समिति स्तर पर सीधे नकद काउंटर चालू किए जाएं। पर्याप्त सरकारी भंडारण के बावजूद जमीनी वितरण तंत्र में बैठे बिचौलियों की मिलीभगत से वास्तविक हकदार कतारों में खड़े हैं। जब तक कालाबाजारी में संलिप्त दुकानदारों के पंजीयन निरस्त नहीं होंगे, तब तक यह संगठित मुनाफाखोरी नहीं रुकेगी।
