जबलपुर। जिले में बीते एक सप्ताह में मौसम में आए अचानक बदलाव और लगातार बारिश से मौसमी तथा संक्रामक बीमारियां तेजी से फैली हैं। तापमान में उतार-चढ़ाव और हवा में नमी के कारण शासकीय अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन 600 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें से करीब 250 से 300 मरीज केवल सर्दी, जुकाम, तेज बुखार, खांसी, गले के संक्रमण और कंजंक्टिवाइटिस से पीड़ित हैं। बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता जारी की है। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. नवीन कोठारी के अनुसार प्राथमिक उपचार के साथ मरीजों को आराम की सलाह मिल रही है तथा सभी आवश्यक दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई गई हैं।
अस्पतालों में आई फ्लू और वायरल का प्रकोप
चिकित्सालयों में जांच के लिए पहुंचे नागरिकों में अधिकांश लोग आंखों में तेज लाली, चुभन, पानी गिरने और भारीपन की समस्या से परेशान हैं। चिकित्सकों के अनुसार वातावरण में अत्यधिक आर्द्रता होने से वायरस बहुत तेजी से सक्रिय होकर एक व्यक्ति से दूसरे में फैल रहा है। इसके साथ ही मरीजों को तेज बदन दर्द, निगलने में परेशानी तथा लंबे समय तक चलने वाली सूखी खांसी जैसी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टर कक्षों के बाहर सुबह से ही कतारें लग रही हैं। नेत्र विशेषज्ञों ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे अपनी आंखों को बार-बार न छुएं, साफ पानी से धोएं, अलग रुमाल का इस्तेमाल करें और धूप या रोशनी में बाहर निकलते समय चश्मा जरूर लगाएं। इसके अतिरिक्त बिना डॉक्टरी सलाह के बाजार से कोई भी दवा या आई ड्रॉप डालने से बचने की हिदायत दी गई है।
गंभीर संक्रामक रोगों से बचाव को विशेष निर्देश
लगातार हो रही बारिश के कारण जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। इस जोखिम को देखते हुए स्वास्थ्य प्रशासन ने डायरिया, खसरा, मलेरिया तथा सर्पदंश जैसी आकस्मिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए पुख्ता प्रबंध करने के दिशा-निर्देश प्रसारित किए हैं। राहत की बात यह है कि जिले में फिलहाल डेंगू अथवा मलेरिया का कोई गंभीर या नया केस सामने नहीं आया है। एहतियात के तौर पर सभी स्वास्थ्य केंद्रों को 24 घंटे सतर्क रखा गया है। जिला अस्पताल में भर्ती किए जाने वाले मरीजों के लिए पर्याप्त बिस्तरों का प्रबंध है और जीवनरक्षक दवाओं का पूरा स्टॉक मौजूद है।
