जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान की व्यवस्था को लेकर राजभवन ने कड़ा रुख अपनाया है। अधिवक्ता अदनान अंसारी ने 6 जुलाई को ईमेल भेजकर विश्वविद्यालय में शिकायत निवारण तंत्र के निष्क्रिय होने की बात उठाई थी। इस मामले में मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 2 फरवरी 2026 को जारी निर्देशों और यूजीसी के वर्ष 2023 के नियमों का हवाला दिया गया था। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राज्यपाल के उप सचिव ने कुलगुरु को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि पूरे मामले का नियमानुसार निराकरण करके की गई कार्रवाई से आवेदक को तुरंत अवगत कराया जाए। अब विश्वविद्यालय प्रशासन को पूरी कार्यप्रणाली की जवाबदेही तय करते हुए रिपोर्ट देनी होगी।
राजभवन के निर्देश से विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप
अधिवक्ता अदनान अंसारी द्वारा भेजी गई शिकायत में बताया गया था कि संस्थान में विद्यार्थियों की समस्याओं को सुनने का ढांचा केवल कागजों तक सीमित रह गया है। यूजीसी के छात्र शिकायत निवारण विनियम 2023 तथा राज्य शासन के 2 फरवरी 2026 के दिशानिर्देशों के बाद भी प्रणाली सक्रिय नहीं हुई। लोकपाल व्यवस्था और शिकायत समिति को जिस तरह काम करना चाहिए था, वैसा काम धरातल पर नहीं दिख रहा है। राजभवन से आए पत्र में साफ उल्लेख है कि इस प्रकरण का निपटारा करने की पूर्ण अधिकारिता विश्वविद्यालय के पास ही है। इसलिए कुलगुरु को अपने स्तर पर विधि अनुसार आवश्यक कदम उठाने होंगे। राज्यपाल के उप सचिव ने इस संबंध में विश्वविद्यालय की पुरानी अनदेखी पर सवाल खड़े करते हुए शीघ्र कार्यवाही के आदेश जारी किए हैं।
पारदर्शी व्यवस्था से तय होगी अब अधिकारियों की जवाबदेही
विश्वविद्यालय परिसर में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की शैक्षणिक, प्रशासनिक और अन्य दैनिक समस्याओं के समाधान के लिए एक पारदर्शी तंत्र की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि लोकपाल और निवारण समिति का संचालन महज एक औपचारिकता बनकर रह गया है, जिससे छात्रों को न्याय मिलने में देरी होती है। राजभवन की इस नई पहल के बाद अब विश्वविद्यालय तंत्र को हर शिकायत का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखना होगा। निर्धारित नियमों के तहत हर आवेदन की जांच होगी और पीड़ित छात्र को की गई कार्यवाही की लिखित जानकारी देना अनिवार्य रहेगा। इस कदम से विश्वविद्यालय परिसर में व्यवस्था सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है।
